नई दिल्ली। विवादों के बीच शनिवार दोपहर तीन बजे निर्वाचन सदन में चुनाव आयोग की अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। आयोग द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र में दावों और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ाने समेत कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई।
SIR में नोटिस पाए लोगों के घर जाएंगे BLO
आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान जिन लोगों को नाम मैप न होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजा गया है, उनके घर BLO जाकर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे। इन दस्तावेजों को ECINET पर अपलोड किया जाएगा, ताकि ERO उनके आधार पर फैसला ले सकें। ऐसे लोगों को सुनवाई के लिए ERO या AERO के ऑफिस बुलाने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ खास मामलों में ही सुनवाई होगी और वह भी ज्यादातर ऑनलाइन ही होगी। DEO जरूरत के हिसाब से नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क या स्पेशल कैंप लगाएंगे।
फॉर्म 6 के साथ लगे घोषणा-पत्र को SC ने ठहराया सही
SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ लगे घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। SIR के अलावा बाकी समय के लिए नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक कमेटी, जिसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र एक्सपर्ट भी शामिल होगा, ECINET की समीक्षा करेगी।
यह कमेटी दोबारा जांच करेगी कि यह सिस्टम कानूनों और नियमों का पालन करता है या नहीं और फिर कमीशन को रिपोर्ट सौंपेगी। पिछले कुछ महीनों में राज्य के CEO से मिले इनपुट के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर फील्ड अधिकारियों को और सुविधाएं दी जाएंगी। अब IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई योजनाओं पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की कमेटी (COO) में चर्चा होगी।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समय सीमा
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जबकि निपटारे की समय सीमा 30 नवंबर 2026 तक तय की गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है और निपटारे की समय सीमा 10 नवंबर तक कर दी गई है।
नाम छूटने पर ऐसे जुड़वाएं वोटर लिस्ट में
बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने साफ कहा है कि कोई भी व्यक्ति जिसका नाम SIR के दौरान या उसके बाद वोटर लिस्ट में छूट गया है, वह संबंधित ERO के पास आवेदन करके अपना नाम शामिल करा सकता है। इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग शामिल हैं। इसके लिए CEO को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं और CEO, DEO तथा ERO इन वोटरों के नाम लिस्ट में शामिल करने के लिए तुरंत एक खास अभियान शुरू करेंगे। गोवा के CEO ने संबंधित BLO को निर्देश दिया है कि वे उन मतदाताओं के घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करें जिनका नाम अभी तक नहीं जुड़ा है।
सर्वसम्मति से लिए गए थे फैसले: आयोग
चुनाव आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में देशभर में SIR समेत कई फैसले लिए गए। SIR को लेकर पहला आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था और इसकी शुरुआत बिहार से हुई। इसके बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी आदेश जारी किए गए। आयोग के मुताबिक ये सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 को अपने आदेश में SIR को सही ठहराया था।
आयोग ने बताया कि सर्वसम्मति से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR का शेड्यूल 27 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था, जबकि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को शेड्यूल जारी हुआ। आयोग ने कहा कि मतदाताओं की अंतिम संख्या का पता तीसरे चरण के बचे हुए 12 राज्यों में वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद ही चलेगा।
CEC पर विपक्ष हमलावर, 30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक
यह बैठक ऐसे समय हुई, जब हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद से विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। INDIA ब्लॉक CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है और इस संबंध में 30 सितंबर को उसकी बैठक होने वाली है।
इससे पहले भी मार्च 2026 में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में 130 और 63 सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस दिए गए थे, जिन्हें 6 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था। बीते दिन CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस, RJD समेत कई विपक्षी पार्टियों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, असम समेत कई राज्यों में विरोध किया, जबकि पटना में RJD ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए पुतले फूंके।
क्यों हुआ विवाद?
अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। इन आपत्तियों में वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म 6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल से जुड़े मुद्दे शामिल थे।














