बीजिंग: दक्षिणी चीन इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है। गुआंग्शी ज़ुआंग ऑटोनॉमस रीजन में हुई मूसलाधार बारिश और बांध टूटने के कारण आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 39 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 4 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इस बीच, एक 30 वर्षीय युवक की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने अपनों को बचाने के लिए मौत के मुंह में छलांग लगा दी।
संपर्क टूटा तो चैन की नींद खोई
जी (Xie) नाम के इस युवक के माता-पिता गांव में फंसे थे। बाढ़ के कारण बिजली गुल थी और मोबाइल सिग्नल भी बंद हो गए थे। जी की मां ने आखिरी बार फोन कर बताया था कि उनके पिता फसल बचाने के लिए गए थे और अभी तक नहीं लौटे हैं। घर की निचली मंजिल तक पानी भर चुका था। जी, जो खुद शहर में रहता था, अपने माता-पिता के हाल को लेकर पूरी रात सो नहीं पाया।
टायर का सहारा और मौत से जंग
बिना किसी देरी के जी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर माता-पिता तक पहुंचने का फैसला किया। शहर की एक दुकान से ट्रक के दो नए टायर खरीदे और बाढ़ के पानी में उतर गए। करीब 3 घंटे तक पानी के बहाव और खतरों से जूझते हुए उन्होंने यह सफर तय किया। आखिरी एक किलोमीटर का रास्ता तो उन्होंने पूरी तरह तैरकर पार किया।
पिता की मुस्कान और मां की डांट
जब जी अपने माता-पिता के घर पहुंचा, तो देखा कि तेजी से बढ़ते पानी के बीच पिता ऊपरी मंजिल पर फंसे हुए थे। बेटे को सकुशल देख पिता के चेहरे पर मुस्कान आ गई, लेकिन साथ ही उन्होंने बेटे को अपनी जान जोखिम में डालने के लिए डांट भी लगाई। जी ने बड़े धैर्य के साथ अपने पिता को सुरक्षित निकाला और गांव के पीछे बने संकरे रास्ते से होते हुए उन्हें पहाड़ पर स्थित सुरक्षित घर तक पहुंचाया। जब मां ने अपने बेटे को पूरी तरह भीगा हुआ और मुसीबत में देखा, तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए, जिसमें चिंता और ममता दोनों झलक रही थी।
कुदरत का कहर
चीन के गुआंग्शी क्षेत्र में इस बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में 39 लोगों की मौत हो चुकी है। घर, फसलें और बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। हालांकि, जी जैसी बहादुरी की कहानियां इस कठिन समय में उम्मीद की किरण जगाती हैं कि आपदा चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अपनों का प्यार और साहस उसे हराने की ताकत रखता है।















