उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला के दौरान एक हाथी के बेकाबू होने की घटना ने सभी को हैरान कर दिया। 18 अक्टूबर को करीब 5 टन वजनी नर हाथी अचानक आक्रामक हो गया। उसने अपने महावत को उठाकर पटक दिया, बिजली के खंभे उखाड़े और ऑटो को भी नुकसान पहुंचाया। हाथी को काबू करने के लिए वन विभाग, पशु चिकित्सकों और महावतों को करीब 14 से 15 घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।

इस घटना के बाद चर्चा शुरू हुई कि क्या मेले में आई एक हथिनी के वापस लौटने से हाथी बेचैन हो गया था? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार से आई हथिनी प्रजनन के अनुकूल अवस्था यानी हीट में थी। हालांकि, पशु चिकित्सकों ने हाथी के व्यवहार में बदलाव के पीछे प्रेम या विरह को निश्चित कारण नहीं बताया। उन्होंने हार्मोनल बदलाव और नर हाथियों में होने वाली मस्ती की अवस्था जैसी संभावनाओं का जिक्र किया।

रामनगर की रामलीला में अचानक बेकाबू हुआ हाथी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 18 अक्टूबर को रामनगर की रामलीला के दौरान करीब 5 टन वजनी नर हाथी अचानक आक्रामक हो गया। हाथी ने अपने महावत को उठाकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद हाथी ने बिजली के खंभे उखाड़ दिए और दो-तीन ऑटो को उठाकर पटकने की कोशिश की। इस दौरान उसने आसपास मौजूद लोगों को भी दौड़ाया।

हाथी के इस व्यवहार से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। उसे नियंत्रित करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पशु चिकित्सकों तथा महावतों की टीम को बुलाया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण हाथी को सुरक्षित तरीके से काबू करने के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ा।

बिहार से आई हथिनी के जाने के बाद बदला व्यवहार?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. नासिर खान ने घटनास्थल पर पहुंचकर हाथी के व्यवहार में बदलाव की वजह समझने की कोशिश की। इस दौरान महावतों ने बताया कि रामलीला मेले में बिहार से एक हथिनी भी आई थी, जो प्रजनन के अनुकूल अवस्था यानी हीट में थी।

कुछ दिन मेले में रहने के बाद हथिनी वापस बिहार चली गई। इसके बाद नर हाथी के व्यवहार में बदलाव की बात सामने आई। इसी घटनाक्रम के चलते लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी कि कहीं हथिनी के चले जाने से हाथी बेचैन तो नहीं हो गया था।

हालांकि, हथिनी के जाने और हाथी के आक्रामक होने के बीच सीधा संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है। केवल घटनाओं के क्रम के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हाथी प्रेम या बिछड़ने के गम में बेकाबू हुआ था।

क्या सच में प्रेम में पागल हो गया था हाथी?

इस सवाल पर डॉ. नासिर खान ने हार्मोनल बदलाव की संभावना जताई। उनके मुताबिक, हथिनी के संपर्क में आने और उसके चले जाने के बाद नर हाथी के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर में बदलाव संभव है। हाथियों की सूंघने की क्षमता बेहद तेज होती है और वे गंध के जरिए मादा हाथी के प्रजनन चक्र से जुड़ी जानकारी पहचान सकते हैं।

हालांकि, किसी हाथी के व्यवहार में बदलाव को सीधे प्रेम या विरह का परिणाम बताना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। इसके पीछे हार्मोनल गतिविधियां, तनाव, वातावरण और दूसरे व्यवहार संबंधी कारण भी हो सकते हैं। रामनगर की घटना में हाथी के आक्रामक होने की सटीक वजह की पुष्टि नहीं हुई है।

नर हाथियों में मस्ती की अवस्था भी हो सकती है वजह

डॉ. नासिर खान के मुताबिक, अक्टूबर से मार्च के बीच नर हाथियों में मस्ती की अवस्था देखने को मिल सकती है। इस दौरान टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे उनके व्यवहार में बदलाव और आक्रामकता देखने को मिलती है। कभी-कभी वे अपने परिचित महावतों पर भी हमला कर सकते हैं।

हालांकि, डॉक्टर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रामनगर की घटना में हाथी निश्चित रूप से इसी अवस्था में था। उन्होंने बताया कि हाथी में मस्ती की अवस्था जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे, लेकिन केवल इन लक्षणों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

ऐसी परिस्थितियों में हाथी को शोर-शराबे और भीड़ से दूर रखना, उसकी गतिविधियों पर नजर रखना और विशेषज्ञों की मदद से उसे सुरक्षित रखना जरूरी होता है।

14-15 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन

डॉ. नासिर खान के मुताबिक, घटना की सूचना मिलने के बाद वह शाम करीब 6 बजे मौके पर पहुंचे। उनके साथ गोरखपुर की टीम भी मौजूद थी। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के अलावा करीब 25 महावत समेत 50 से 60 लोग हाथी को नियंत्रित करने के अभियान में जुटे थे।

शुरुआत में हाथी को दवा दिए बिना शारीरिक रूप से नियंत्रित करने की कोशिश की गई। शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक महावतों ने हुक और चेन की मदद से उसे काबू करने का प्रयास किया, लेकिन हाथी किसी के निर्देश नहीं मान रहा था।

आखिरकार, विशेषज्ञों ने उसे ट्रैंक्विलाइज यानी दवा देकर शांत करने का फैसला किया। करीब 14 से 15 घंटे की मशक्कत के बाद हाथी को नियंत्रित किया जा सका।

हाथी को बेहोश करने के बाद करवट लिटाना क्यों जरूरी?

डॉ. नासिर खान के मुताबिक, जब कोई हाथी बेकाबू हो जाता है, तो सबसे पहले आसपास की घेराबंदी और भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी होता है। यदि उसे शारीरिक रूप से काबू करना संभव न हो, तो विशेषज्ञों की निगरानी में दवा देकर शांत करने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

दवा का असर होने के बाद हाथी को सुरक्षित स्थिति में रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इतना भारी जानवर गलत स्थिति में बैठ जाए या लेट जाए, तो उसके शरीर पर दबाव पड़ सकता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में जरूरत के अनुसार उसे करवट के बल लिटाया जाता है। इतने विशाल जानवर को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए जेसीबी जैसी मशीनों की मदद भी लेनी पड़ सकती है।

हाथी की घटना ने छोड़े कई सवाल

रामनगर की रामलीला में हुई इस घटना ने एक बार फिर हाथियों के व्यवहार, उनकी हार्मोनल गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। हथिनी के मेले में आने और वापस लौटने के बाद नर हाथी के आक्रामक होने की चर्चा जरूर हुई, लेकिन इसे प्रेम या बिछड़ने का नतीजा मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आए हैं।

पशु विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में भावनात्मक अटकलों के बजाय हाथी के स्वास्थ्य, हार्मोनल बदलाव और व्यवहार संबंधी परिस्थितियों की जांच करना जरूरी है।

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