इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की गिनती के दौरान मतदाताओं की निजता और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ ने EVM ‘टोटलाइजर’ (Totaliser) व्यवस्था लागू करने की मांग पर केंद्र सरकार से विशेष हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि बूथ-वार वोटिंग पैटर्न छिपाने के लिए नियमावली में Rule 59A जैसा बदलाव करने में क्या कानूनी और व्यावहारिक अड़चनें हैं।
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय और वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने तर्क दिया कि हर बूथ का चुनाव परिणाम अलग से घोषित होने के कारण राजनीतिक पार्टियां यह जान लेती हैं कि किस इलाके से उन्हें कम वोट मिले हैं। इसके चलते चुनाव के बाद उन क्षेत्रों के लोगों को निशाना बनाया जाता है और राजनीतिक रंजिश या हिंसा बढ़ती है। यदि 14-15 EVM को एक साथ टोटलाइजर मशीन से जोड़कर गिना जाए, तो किसी खास इलाके का वोटिंग रुझान गुप्त रहेगा और मतदाताओं की निजता सुरक्षित रहेगी। पीठ में शामिल जस्टिस बागची ने भी माना कि वोटर की पसंद की गोपनीयता के लिए टोटलाइजर एक बेहतरीन टूल हो सकता है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के वकील डी एस नायडू ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी और मंत्रियों के समूह ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है तथा कई राजनीतिक दलों ने भी इसका विरोध किया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि इसे लागू करने के लिए चुनावी कानूनों और नियमों में संशोधन की आवश्यकता होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत मामला है और केंद्र सरकार के रुख के बिना इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता। फिलहाल टोटलाइजर लागू करने का सीधा आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन केंद्र का जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।














