बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। टीवी डिबेट्स में सत्ताधारी पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे पूनावाला ने अपने इस फैसले के पीछे आर्थिक और निजी चुनौतियों का हवाला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति कोई नौकरी नहीं है और एक पहली पीढ़ी के राजनेता के रूप में गुजारा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।
पूनावाला ने एक इंटरव्यू में कहा, “पार्टी का काम किसी कार्यकर्ता का गुजारा करना नहीं है। मुझे अपना घर का किराया देना है और मकान मालिक यह नहीं देखेगा कि मैं बीजेपी का प्रवक्ता हूं या नहीं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ज्यादातर राजनेता या तो ‘लेता’ (फायदा लेने वाले) होते हैं या फिर ‘बेटा’ (राजनीतिक विरासत वाले), लेकिन वह इन दोनों श्रेणियों में नहीं आते। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बाद 2021 में बीजेपी का दामन थामा था और उनका कहना है कि वे अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और पार्टी की विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
अपने इस्तीफे पर चल रही साजिश की थ्योरीज को खारिज करते हुए उन्होंने साफ किया कि यह उनका निजी फैसला है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कुछ हफ्ते पहले अपनी चुनौतियों के बारे में पार्टी नेतृत्व को बताया, तो उन्होंने मदद करने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनका जमीर उन्हें पद पर बने रहने की इजाजत नहीं दे रहा था। कांग्रेस में वापसी की किसी भी संभावना को सिरे से नकारते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे सिर्फ तभी कांग्रेस में जा सकते हैं जब गांधी परिवार पार्टी से हट जाए और नेहरू के कार्यों के लिए माफी मांगी जाए।
शहजाद पूनावाला ने कहा कि बीजेपी उनके लिए कभी भी नौकरी का जरिया नहीं थी, बल्कि यह एक विचारधारा से जुड़ने का मौका था। उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन इस बात को दोहराया कि मोदी जी से बड़ा नेता देश में न तो कोई हुआ है और न ही होगा।



