कानपुर: कानपुर नगर निगम में सामने आए घोटाले की जांच में आगरा कनेक्शन सामने आने का दावा किया जा रहा है। इस मामले में मास्टरमाइंड बताए जा रहे गोविंद शर्मा आगरा के रहने वाले हैं। वहीं ठेकेदार रवि लवानिया भी आगरा का निवासी बताया जा रहा है। आरोप है कि लवानिया फर्जी तरीके से सरकारी टेंडर हासिल करने में माहिर था और टेंडर प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था।
बताया जा रहा है कि सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए लवानिया की ओर से फर्जी बैलेंस शीट लगाई जाती थी। कागजों में जिस कंपनी का टर्नओवर महज 4 करोड़ रुपये बताया जाता था, उसे बढ़ाकर 84 करोड़ रुपये दिखाने का आरोप है। इस तरह टेंडर की पात्रता पूरी कर काम हासिल किए जाने की बात सामने आई है।
रवि लवानिया का नाम मथुरा नगर निगम में भी कथित अनियमितताओं से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि बिना काम किए सेटिंग के जरिए भुगतान करा लिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ब्लैकलिस्ट किए जा चुके लवानिया को कानपुर नगर निगम में काम कैसे मिला।जानकारी के मुताबिक रवि लवानिया को मध्य प्रदेश, आगरा और अलीगढ़ में भी ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इसके बावजूद कानपुर में उसे काम मिलने को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल रवि लवानिया पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। वहीं नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर उसे संरक्षण देने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। मामले में पुलिस और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट होगी।













