डेस्क : उम्र बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई बार कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां, थकान और त्वचा की बेजानियत नजर आने लगती है। इसके पीछे सिर्फ बढ़ती उम्र जिम्मेदार नहीं होती। हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली और कुछ आदतें भी शरीर और त्वचा पर समय से पहले उम्र बढ़ने के असर को बढ़ा सकती हैं।
लगातार कई घंटे बैठे रहना आज की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है। ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने या लगातार स्क्रीन के सामने रहने से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है।
नींद पूरी नहीं होना भी शरीर और त्वचा के लिए नुकसानदायक
नींद पूरी नहीं होना भी शरीर और त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सोने के दौरान शरीर की रिकवरी और त्वचा की रिपेयर प्रक्रिया होती है। पर्याप्त नींद न मिलने पर चेहरा थका हुआ और त्वचा बेजान नजर आ सकती है। जरूरत से ज्यादा चीनी खाना भी त्वचा की सेहत को प्रभावित कर सकता है। अधिक शुगर का सेवन शरीर में ऐसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे सकता है, जो त्वचा के कोलेजन को प्रभावित करती हैं और समय के साथ एजिंग के संकेत नजर आ सकते हैं।
कम पानी पीने की आदत से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता
बता दे कि इसी तरह पानी कम पीने की आदत से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है और स्किन रूखी तथा थकी हुई लग सकती है। लगातार तनाव में रहना भी सेहत और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है। लंबे समय तक स्ट्रेस रहने पर शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिसका असर नींद, ऊर्जा और सामान्य स्वास्थ्य पर पड़ता है।
सूरज की यूवी किरणों से त्वचा की सुरक्षा न करना भी समय से पहले एजिंग का एक अहम कारण हो सकता है। लंबे समय तक धूप में रहने से झुर्रियां, दाग-धब्बे और त्वचा को होने वाला नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए जरूरत के अनुसार सन प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करना जरूरी है।
जंक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड को नियमित डाइट का हिस्सा बनाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। वहीं, फिजिकल एक्टिविटी की कमी से शरीर की फिटनेस, ताकत और ऊर्जा पर असर पड़ सकता है। आज के दौर में मोबाइल और लैपटॉप पर जरूरत से ज्यादा समय बिताना भी एक आम समस्या है। लंबे स्क्रीन टाइम से आंखों पर तनाव पड़ सकता है और देर रात स्क्रीन इस्तेमाल करने से नींद का पैटर्न भी प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा सामाजिक मेलजोल कम होना और लगातार नकारात्मक माहौल में रहना मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। खुश रहने, लोगों से जुड़ने और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।
इन आदतों में ऐसे लाएं बदलाव
लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय हर 30 से 40 मिनट में कुछ देर के लिए उठकर चलना उपयोगी हो सकता है। रोजाना 20 से 30 मिनट की एक्सरसाइज, योग या अन्य शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद पर ध्यान देना भी जरूरी है। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, वॉकिंग या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालें।
डिस्क्लेमर: आर्टिकल में दी गई सलाह और सुझाव सिर्फ़ आम गाइडेंस के लिए हैं और इन्हें प्रोफेशनल मेडिकल सलाह नहीं मानना चाहिए। अगर आपके कोई सवाल या चिंताएं हैं, तो हमेशा डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।















