उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद हिमनद झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी और चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की के सहयोग से GLOF Monitoring and Early Warning System स्थापित करने की तैयारी में है।
वसुंधरा ताल में सितंबर में लगेगा पहला सिस्टम
सीबीआरआई ने मौसम अनुकूल रहने की स्थिति में 20 से 30 सितंबर के बीच चमोली जिले की अति संवेदनशील वसुंधरा ताल झील में पहला अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
इस सिस्टम के जरिए झील में होने वाली असामान्य गतिविधियों की जानकारी एक से दो मिनट के भीतर कंट्रोल रूम तक पहुंच सकेगी। झील में हिमखंड गिरने, जलस्तर बढ़ने या झील का बांध टूटने जैसी स्थिति में सेंसर तत्काल डाटा भेजेंगे।
सेंसर के साथ लगाए जाएंगे कैमरे
प्रस्तावित सिस्टम में सेंसर को सेटेलाइट से जोड़ा जाएगा। वहीं, घटनाक्रम की पुष्टि के लिए झील क्षेत्र में कैमरे भी लगाए जाएंगे। इससे किसी संभावित खतरे की स्थिति में संबंधित इलाकों के लिए जल्द अलर्ट जारी करने में मदद मिलेगी।
20 किमी तक पहुंचने में लग सकते हैं 8 से 10 मिनट
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वसुंधरा ताल किसी वजह से टूटता है तो पानी और मलबे को करीब 20 किलोमीटर नीचे तक पहुंचने में 8 से 10 मिनट लग सकते हैं। इसके बाद निचले क्षेत्रों की ओर बढ़ते हुए पानी को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचने में आधा घंटा, एक घंटा या उससे अधिक समय लग सकता है।
ऐसे में शुरुआती कुछ मिनटों में मिलने वाली चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मौसम की भी होगी लगातार निगरानी
वसुंधरा ताल में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा। इसके जरिए तापमान, मौसम, बारिश और बर्फबारी जैसी गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा सकेगी। इससे झील के आसपास बदलती परिस्थितियों और संभावित खतरे का आकलन करने में मदद मिलेगी।
चार अन्य संवेदनशील झीलों में भी लगेगा सिस्टम
वसुंधरा ताल के बाद अप्रैल-मई तक चार अन्य संवेदनशील हिमनद झीलों में भी यह सिस्टम लगाने की योजना है। इसके बाद जोखिम श्रेणी वाली आठ अन्य झीलों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।
दून या रुड़की में बनेगा कंट्रोल रूम
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, GLOF Monitoring and Early Warning System का कंट्रोल रूम सीबीआरआई रुड़की या देहरादून स्थित वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान में स्थापित किया जा सकता है। यह कंट्रोल रूम राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से भी जुड़ा रहेगा।













