उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाज के कुछ लोग खुद ही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे थे। इसी दौरान नारेबाजी और विरोध शुरू हो गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। बाद में दोबारा पथराव होने पर लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा मस्जिद का हिस्सा
शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी है। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है और मस्जिद का कुछ हिस्सा निर्धारित सड़क सीमा में आने की बात प्रशासन की ओर से कही गई है। यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ता है। प्रशासन के अनुसार सिंहस्थ-2028 और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है।
नारेबाजी के बाद बढ़ा तनाव, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस
सोमवार सुबह बातचीत के बाद समाज के कुछ लोग मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने के लिए पहुंचे, लेकिन मौके पर नारेबाजी और विरोध शुरू हो गया। पुलिस के मुताबिक भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पथराव हुआ, जिसके बाद आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। बाद में दोपहर करीब 12 बजे दोबारा पथराव की घटना हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
10 लोगों पर FIR, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
पुलिस ने पथराव और शांति भंग करने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की गई तथा बैरिकेडिंग के जरिए स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
शहर काजी ने की शांति बनाए रखने की अपील
शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने के बीच उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मस्जिद को लेकर रात में ही सहमति बन गई थी और उसी के अनुसार काम किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से बिना वजह बाजार में जमा नहीं होने और अफवाहों के कारण घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की।
उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत मास्टर प्लान के अनुरूप निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के कार्य किए जा रहे हैं।
मस्जिद कमेटी ने हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका
शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है। एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद मामला इंदौर स्थित युगलपीठ के सामने पहुंचा है। 28 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई प्रस्तावित होने की जानकारी सामने आई है।
मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह ऐतिहासिक इमारत है और इसके समर्थन में दस्तावेज मौजूद हैं। मस्जिद पक्ष के अनुसार वर्ष 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी, जिसके बाद वहां 40 फीट चौड़ी सड़क बनी।
मस्जिद की पुरातनता को लेकर अलग दावा
मस्जिद पक्ष की ओर से शाही मस्जिद को 636 साल पुरानी बताया गया है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम के अनुसार, मस्जिद का हिस्सा हटाने से पूरी इमारत की संरचना प्रभावित हो सकती है। प्रशासन की कार्रवाई में एक ओर से करीब चार फीट और दूसरी ओर से करीब नौ फीट हिस्सा हटाए जाने का दावा किया गया है।
उज्जैन से बाहर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
मामले को लेकर उज्जैन के बाहर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर मस्जिद पर कार्रवाई का विरोध किया और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। ओवैसी ने वक्फ कानून में संशोधन को लेकर भी अपनी आपत्ति जाहिर की। ये उनके राजनीतिक आरोप और प्रतिक्रिया हैं।














