प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वकीलों और वादकारियों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि देश में कहीं भी विधिवत नोटरीकृत किया गया शपथपत्र रिट याचिका दाखिल करने के शुरुआती चरण में पूरी तरह स्वीकार्य होगा। इसके लिए याचिकाकर्ताओं को रिट कार्यवाही शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से इलाहाबाद या लखनऊ स्थित उच्च न्यायालय की पीठों के फोटो सेंटर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने फोटो शपथपत्र पहचान प्रणाली की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। पीठ ने कहा कि चूंकि उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि विधिवत नोटरीकृत शपथपत्र दाखिल करने के चरण में स्वीकार्य हैं, इसलिए किसी भी व्यक्ति के लिए फोटो सत्यापन केंद्र में शारीरिक रूप से उपस्थित होना बाध्यकारी नहीं है।
इस व्यवस्था के लागू होने से देश के दूर-दराज के इलाकों से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले लोगों को बड़ी सहूलियत मिलेगी, जिन्हें पहले छोटे-छोटे कामों के लिए भी व्यक्तिगत रूप से अदालत परिसर स्थित सेंटर्स पर आना पड़ता था। न्यायालय के इस कदम से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आने के साथ-साथ समय और धन की भी बचत होगी।












