नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान को आजादी भले ही एक ही वक्त पर मिली हो, लेकिन दोनों देश अपना स्वतंत्रता दिवस अलग-अलग दिन मनाते हैं। पाकिस्तान जहां 14 अगस्त को आजादी का जश्न मनाता है, वहीं भारत 15 अगस्त को। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों है? इसके पीछे की असली वजह तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पसंद और कुछ धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
माउंटबेटन ने क्यों चुनी 15 अगस्त?
जब मार्च 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन आखिरी वायसराय बनकर भारत आए, तो ब्रिटेन ने उन्हें सत्ता हस्तांतरण के लिए जून 1948 तक का वक्त दिया था। यानी उनके पास सोलह महीने से ज्यादा का समय था। लेकिन देश की बिगड़ती हालत—कमजोर अंतरिम सरकार, तेजी से फैलते सांप्रदायिक दंगे और पाकिस्तान की जोर पकड़ती मांग—ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
उन्होंने 15 अगस्त की तारीख खुद चुनी, क्योंकि यह दिन उनके लिए भावनात्मक तौर पर खास था। दरअसल, 15 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सिंगापुर में जापानी सेना ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था और माउंटबेटन उस वक्त दक्षिण पूर्व एशिया में सुप्रीम अलाइड कमांडर थे। यही वजह थी कि उन्होंने भारत की आजादी के लिए भी यही तारीख तय की।
दो हफ्ते में ही बन गया कानून
माउंटबेटन के फैसले के बाद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया बेहद तेजी से चली। 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में भारत और पाकिस्तान को दो अलग डोमिनियन बनाने के लिए कानून पेश किया गया और महज दो हफ्ते के भीतर ही इसे पारित कर दिया गया। इस कानून में भारत की आजादी की तारीख 15 अगस्त 1947 तय की गई थी।
फिर पाकिस्तान 14 अगस्त को कैसे हुआ आजाद?
इसके पीछे दो बड़ी वजहें बताई जाती हैं। पहली, माउंटबेटन एक ही दिन भारत और पाकिस्तान दोनों जगह होने वाले आजादी के समारोहों में शामिल नहीं हो सकते थे, इसलिए पाकिस्तान का कार्यक्रम एक दिन पहले यानी 14 अगस्त 1947 को कराची में आयोजित किया गया। दूसरी वजह धार्मिक भी मानी जाती है। कहा जाता है कि 14 अगस्त 1947 को रमजान का 27वां दिन था, जिसे मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इन्हीं वजहों से पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता आ रहा है।














