उत्तर-प्रदेश: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की धनराशि में कथित हेराफेरी और सीसीटीवी डेटा डिलीट होने के विवादों के बीच अब एक और नया और बेहद गंभीर दावा सामने आया है। इस बार सिंधी समाज ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। सिंधी समाज की ओर से यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि राम मंदिर निर्माण और रामलला के लिए उनके समाज द्वारा 200 किलो चांदी दान में दी गई थी, लेकिन ट्रस्ट के पास इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या हिसाब नहीं है और न ही दानदाताओं को इसकी कोई रसीद दी गई।

सिंधी समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि चांदी की ये बहुमूल्य शिलाएं सीधे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपी गई थीं। अब समाज की ओर से यह तीखा सवाल उठाया जा रहा है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी श्रद्धापूर्वक दान की गई थी, तो उसकी आधिकारिक रसीद और एंट्री रिकॉर्ड से क्यों गायब है? दानदाताओं का कहना है कि पवित्र मंदिर के नाम पर दिए गए इतने बड़े चढ़ावे की पावती न मिलना वित्तीय अनियमितताओं की ओर सीधा इशारा करता है।

आपको बता दें कि यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब विशेष जांच टीम पहले से ही दानपात्रों से रकम गायब होने, रसीदों में गड़बड़ी और 8 महीने का सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने जैसे गंभीर आरोपों की तफ्तीश कर रही है। विपक्ष और विभिन्न धार्मिक संगठन पहले ही इस मुद्दे पर सरकार और ट्रस्ट को घेर रहे हैं। अब 200 किलो चांदी की रसीद न मिलने के इस नए दावे ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जवाबदेही पर दबाव और अधिक बढ़ गया है।

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