कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे मुश्किल और नाजुक दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर मची अंदरूनी कलह और बगावत अब खुलकर सड़कों और कोर्ट रूम तक आ गई है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता, चार बार के लोकसभा सांसद और कलकत्ता हाई कोर्ट के दिग्गज अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का केस लड़ने से साफ इंकार कर दिया है। इसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा और तगड़ा झटका माना जा रहा है।
विधायक मिलान मामले में सीआईडी (CID) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली अभिषेक बनर्जी की याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को कल्याण बनर्जी अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद आर्यन भट्टाचार्य ने कोर्ट में अभिषेक का पक्ष रखा। मीडिया से बात करते हुए कल्याण बनर्जी का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं है, बल्कि बात उनके अहंकारी व्यवहार की है। उन्हीं के गलत फैसलों और घमंड की वजह से पार्टी को हालिया चुनावों में इतनी बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा है। अभिषेक के चलते आज टीएमसी पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई है, लेकिन उनका अहंकार अभी भी कम नहीं हुआ है।”
ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम और 19 सांसदों की बगावत
सांसद कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अब ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह या तो अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को चुनें या फिर उन पुराने और वरिष्ठ नेताओं को जो पिछले कई दशकों से उनके प्रति पूरी तरह वफादार रहे हैं। कल्याण बनर्जी ने कहा, “मैं पिछले 45 साल से कानूनी पेशे में हूँ, और मैं अब अभिषेक बनर्जी का यह अहंकार और अमर्यादित व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
इस बड़े विवाद के बीच, टीएमसी के भीतर बड़ी बगावत की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी के कई सांसद और विधायक इस समय पूरी तरह बगावती मूड में नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में टीएमसी के 19 बागी सांसदों की एक सूची तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है, जो शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।
चर्चा में चल रहे 19 बागी सांसदों की सूची:
काकोली घोष (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खली उर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बेहरामपुर), अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलधर (मथुरापुर), सयोनी घोष (जादवपुर), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी-देव (घाटल), कालीपद सोरेन (झालग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा), डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व), शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), असित कुमार मल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम) और रचना बनर्जी (हुगली)।
वरिष्ठ नेताओं के इस बागी रुख और चुनावी हार के बाद उपजे इस आंतरिक असंतोष ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है, जिससे ममता बनर्जी की राहें आने वाले दिनों में और मुश्किल होने वाली हैं।



