उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने शुरुआत से ही संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई का परिचय दिया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि न्याय की इस लड़ाई में किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई न बरती जाए। घटना के सामने आने के महज 24 घंटे के भीतर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने पुख्ता साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई और अदालत ने कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा, पीड़ित परिवार की भावनाओं और मांगों का सम्मान करते हुए सरकार ने सरकारी अधिवक्ताओं में बदलाव किए तथा माता-पिता की मांग के अनुरूप सीबीआई जांच की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया।
पीड़ित परिवार को सामाजिक और आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने के भी पुख्ता कदम उठाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट संदेश है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह पूरा प्रकरण प्रशासनिक जवाबदेही और शासन की संवेदनशीलता का एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करता है।










