डेस्क : सर्दियों में तापमान गिरने के साथ छोटे बच्चों में खांसी, जुकाम और कफ जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। ऐसे मौसम में माता-पिता के लिए बच्चों की सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। आमतौर पर खांसी और जुकाम वायरल संक्रमण के कारण होते हैं और ज्यादातर बच्चे कुछ समय में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, इस दौरान सही देखभाल, पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देना बेहद जरूरी है।
बच्चे की उम्र और लक्षणों के अनुसार कुछ आसान उपाय उसे राहत देने में मदद कर सकते हैं। वहीं, कुछ लक्षण ऐसे भी हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि घर पर बच्चे की देखभाल कैसे करें और किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
खांसी में राहत के लिए शहद और गुनगुने तरल पदार्थ
बच्चे को खांसी होने पर गले में परेशानी हो सकती है और रात के समय खांसी बढ़ने से उसकी नींद भी प्रभावित हो सकती है। एक साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को थोड़ी मात्रा में शहद देने से खांसी में राहत मिल सकती है। शहद गले को आराम देने और रात में होने वाली खांसी को कम करने में मदद कर सकता है।
हालांकि, एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए। इससे शिशु बोटुलिज्म नामक गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार पानी, सूप या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ देते रहें। इससे शरीर में पानी की कमी से बचने में मदद मिलती है और गले को भी आराम मिल सकता है। यदि बच्चा मां का दूध पीता है, तो स्तनपान जारी रखें।
नाक बंद होने पर अपनाएं ये उपाय
सर्दी-जुकाम के दौरान छोटे बच्चों की नाक बंद होना आम समस्या है। इससे उन्हें सांस लेने, सोने और दूध पीने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में सलाइन नेजल ड्रॉप्स यानी नमक के पानी से बनी तैयार बूंदें नाक में जमा बलगम को ढीला करने में मदद कर सकती हैं। छोटे बच्चों की नाक साफ करने के लिए किसी उपकरण का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें। बच्चे की उम्र के अनुसार सही तरीका अपनाना जरूरी है।
अगर कमरे की हवा बहुत सूखी है, तो साफ कूल-मिस्ट ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके पानी और उपकरण की नियमित सफाई करना जरूरी है, ताकि उसमें गंदगी या फफूंदी जमा न हो। बच्चे को गर्म पानी से भाप देने के लिए उबलते पानी के बर्तन के ऊपर न बैठाएं। ऐसा करने से गंभीर रूप से जलने का खतरा रहता है। इसके बजाय नाक बंद होने पर सुरक्षित उपाय अपनाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
बच्चों को पर्याप्त आराम देना भी जरूरी
खांसी-जुकाम के दौरान बच्चे को पर्याप्त आराम करने दें। उसकी उम्र के अनुसार तरल पदार्थ देते रहें और स्तनपान करने वाले शिशु को नियमित रूप से दूध पिलाएं। बच्चे की सांस लेने की स्थिति, खाने-पीने और सामान्य गतिविधियों पर ध्यान रखें।
छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी-जुकाम की दवाएं नहीं देनी चाहिए। खासकर छह साल से कम उम्र के बच्चों में ऐसी दवाओं से नुकसान हो सकता है। बच्चे की उम्र, लक्षण और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ही उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, तुरंत लें चिकित्सा सहायता
सर्दी-जुकाम के अधिकतर मामले समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। यदि बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो, सांस बहुत तेज चल रही हो या उसके होंठ नीले पड़ने लगें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
यदि बच्चा दूध या पानी नहीं पी पा रहा है, बहुत सुस्त हो गया है या उसके शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो भी बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा, यदि बुखार चार दिन से ज्यादा बना रहे, खांसी-जुकाम के लक्षण दस दिन तक ठीक न हों या सुधार होने के बाद दोबारा बिगड़ने लगें, तो बच्चे की चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
बच्चों की सेहत के लिए सावधानी सबसे जरूरी
सर्दियों में बच्चों को खांसी-जुकाम होने पर घबराने के बजाय उनकी स्थिति पर नजर रखना और सुरक्षित तरीके से देखभाल करना जरूरी है। पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम और नाक बंद होने पर उचित उपाय बच्चे को राहत दे सकते हैं। लेकिन सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या पानी की कमी जैसे संकेत दिखने पर घरेलू उपायों के भरोसे न रहें। समय पर डॉक्टर की सलाह लेना ही बच्चे की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी कदम है।
डिस्क्लेमर: घरेलू नुस्खे हर बच्चे के लिए सही नहीं होते और डॉक्टर के इलाज का ऑप्शन नहीं हैं। एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें और बच्चों को गर्म पानी से भाप न दें। अगर आपको सांस लेने में दिक्कत, तेज़ बुखार जैसे कोई और गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।














