पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर शुरू हुई अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब मामलों के प्रभारी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाज़ी के बीच कई नेताओं ने संगठन के फैसलों पर नाराजगी जताई है, जिससे हाईकमान के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
चन्नी गुट नियुक्तियों के फैसले की समीक्षा की मांग कर रहा है
जानकारी के मुताबिक, संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर असहमति इतनी बढ़ गई कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा से जुड़े नेताओं ने भूपेश बघेल की बैठक से दूरी बना ली और अलग बैठक आयोजित की। दूसरी ओर, कांग्रेस हाईकमान पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थन में मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है, जबकि चन्नी गुट नियुक्तियों के फैसले की समीक्षा की मांग कर रहा है।
मौजूदा हालात ने उनकी कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है
भूपेश बघेल को कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में संगठन को मजबूत करने और गुटबाज़ी खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन मौजूदा हालात ने उनकी कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इससे पहले छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया, जहां भी कांग्रेस उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।














