उत्तर प्रदेश के थानों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों और पावर बैकअप के काम न करने को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस स्टेशन एक बेहद “संवेदनशील स्थान” है, और वहाँ इन बुनियादी सुविधाओं का सुचारू रूप से काम न करना सीधे तौर पर पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की अपनी ड्यूटी में गंभीर लापरवाही है।
यह पूरा मामला देवरिया जिले के भलुअनी पुलिस स्टेशन का है, जहाँ एक व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखने के आरोप की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज मांगी थी। लेकिन वहां के थाना प्रभारी ने यह बहाना बना दिया कि बिजली न होने के कारण फुटेज नहीं मिल सकी। अदालत को जब यह पता चला कि दिसंबर 2024 से ही थाने का जनरेटर और सोलर पैनल खराब पड़ा था और पुलिस ने उसकी मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया, तो जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ भड़क उठी।
डीजीपी को सख्त निर्देश और एसपी देवरिया तलब
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे राज्य के सभी पुलिस प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने के आदेश दें कि सभी थाने पूरी तरह सुसज्जित और तकनीकी रूप से सक्रिय रहें। केवल कागजी कार्रवाई या खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। कोर्ट ने इस मामले में कड़ा कदम उठाते हुए एसपी देवरिया को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया है, ताकि वे जिले के सभी थानों की स्थिति का पूरा ब्यौरा दे सकें। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 तय की गई है, जिसमें एसपी देवरिया और संबंधित थाना प्रभारी दोनों को मौजूद रहने का आदेश दिया गया है।












