अमेरिका में 2026 के मिड-टर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस नतीजे को अमेरिकी मीडिया ट्रंप की दूसरी पारी के लिए बड़े जनमत संग्रह और उनकी नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी के रूप में देख रहा है। रिपब्लिकन पार्टी को उन राज्यों में भी हार का सामना करना पड़ा है, जिन्हें उसका मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है।
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन चुनावों में मतदाताओं ने महंगाई, ईरान युद्ध, टैरिफ और ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। नतीजों ने यह भी दिखाया है कि ट्रंप का समर्थन उनके पसंदीदा उम्मीदवारों की जीत की गारंटी नहीं रह गया है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल: ट्रंप की राजनीतिक पकड़ पर उठे सवाल
वॉल स्ट्रीट जर्नल की चुनावी समीक्षा में डेमोक्रेट्स की जीत को ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को कई महत्वपूर्ण सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
अखबार के विश्लेषण में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों, टैरिफ और ईरान युद्ध को रिपब्लिकन पार्टी की हार के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। ट्रंप के उम्मीदवारों के चयन और उनके चुनाव प्रचार के तरीकों पर भी सवाल उठे हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट: रिपब्लिकन के मजबूत गढ़ों में भी डेमोक्रेट्स की जीत
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में चुनावी नतीजों को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताया गया है। डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे राज्यों और क्षेत्रों में जीत हासिल की, जहां रिपब्लिकन पार्टी लंबे समय से मजबूत स्थिति में रही थी।
टेक्सास और दक्षिण कैरोलिना जैसे राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत ने अमेरिकी राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप के लिए अपने कार्यकाल के बाकी दो साल में नीतियों को लागू करना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स: ट्रंप के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी आई सामने
न्यूयॉर्क टाइम्स की चुनावी कवरेज में ट्रंप की नीतियों और उनके दूसरे कार्यकाल को लेकर मतदाताओं के रुख पर जोर दिया गया है। चुनावी नतीजों से संकेत मिला है कि केवल डेमोक्रेट समर्थक ही नहीं, बल्कि निर्दलीय और कुछ रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच भी ट्रंप की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ा है।
महंगाई, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति और सरकार के कामकाज को लेकर मतदाताओं की चिंताएं चुनाव में महत्वपूर्ण मुद्दे बनकर सामने आईं।
CNN ने बताया डेमोक्रेटिक लहर का चुनाव
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के मिड-टर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी लहर देखने को मिली। रिपब्लिकन पार्टी को उन राज्यों में भी हार मिली, जहां उसने पिछले कई चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था।
टेक्सास में जेम्स तालारिको की जीत और रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन की हार को इस बदलाव का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिला कि ट्रंप का चुनावी समर्थन अब हर राज्य और हर उम्मीदवार के लिए जीत की गारंटी नहीं है।
महंगाई और ईरान युद्ध बने रिपब्लिकन की हार की बड़ी वजह
अमेरिकी मीडिया और चुनावी एग्जिट पोल के विश्लेषण में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे कई अहम कारण सामने आए हैं।
- आर्थिक असंतोष: एग्जिट पोल के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, करीब 75 फीसदी मतदाताओं ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को खराब या संतोषजनक नहीं बताया। महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें बड़ा मुद्दा रहीं।
- ईरान युद्ध: करीब 74 फीसदी मतदाताओं ने ईरान युद्ध को अपने वोट के फैसले में महत्वपूर्ण या निर्णायक मुद्दा बताया।
- टैरिफ नीति: ट्रंप प्रशासन की आयात शुल्क यानी टैरिफ नीति को लेकर भी मतदाताओं में नाराजगी देखने को मिली।
- ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें: पेट्रोल-डीजल और किराने के सामान की बढ़ती कीमतों ने आम अमेरिकी परिवारों की आर्थिक चिंताएं बढ़ाईं।
- ट्रंप का चुनावी समर्थन: ट्रंप ने कई विवादास्पद उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन किया, लेकिन वे चुनावी जीत में इसे बदलने में सफल नहीं रहे।
अब ट्रंप के सामने बढ़ेंगी राजनीतिक चुनौतियां
डेमोक्रेट्स के कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो साल काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। अब डेमोक्रेट्स को सरकार की नीतियों की निगरानी, जांच और विधायी फैसलों को प्रभावित करने की अधिक शक्ति मिलेगी।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन के महत्वपूर्ण फैसलों और नियुक्तियों पर भी विपक्ष का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में 2026 के मिड-टर्म चुनावों के नतीजे अमेरिकी राजनीति की दिशा बदलने वाले साबित हो सकते हैं।



