डेस्क: अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत, रिज़वान सईद शेख ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए शुरुआती कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग उपाय जरूरी हैं, लेकिन यह प्रोसेस जटिल और समय लेने वाला होगा।

शेख ने बताया कि शुरूआती कदम के रूप में जहाजों की मूवमेंट में विशेष कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग उपाय दिखाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल ऑपरेशन का कॉन्सेप्ट नहीं, बल्कि एक प्रूफ़ ऑफ़ कॉन्सेप्ट है, जो सिस्टम में विश्वास बनाने और वास्तविक बातचीत शुरू करने के लिए अहम है।

राजदूत ने ईरान के भीतर के हालात और वहाँ मौजूद कम्युनिकेशन बाधाओं का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि ईरान एक युद्धग्रस्त देश है, जहां सही समय पर जवाब पाना आसान नहीं है। इसी वजह से बातचीत की डेडलाइन पहले भी बढ़ाई जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान केवल फैसिलिटेटर की भूमिका निभा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी उन विवादित पार्टियों पर है जो वार्ता में शामिल हैं।

शेख ने जोर दिया कि विवादित पार्टियों को न केवल बातचीत की शर्तें पूरी करनी होंगी, बल्कि ऐसे निर्णय भी लेने होंगे जो बातचीत को सफल बना सकें। उनका कहना था कि प्रक्रिया अपने आप नहीं चलेगी, इसे सफल बनाने के लिए सभी पक्षों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि पाकिस्तानी बिचौलियों की मदद से अमेरिका और ईरान के बीच इनडायरेक्ट बातचीत में “पॉज़िटिव प्रोग्रेस” हो रही है। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए सीज़फ़ायर डील की संभावना है या नहीं, तो ट्रंप ने कोई ठोस जानकारी देने से इंकार कर दिया।

रिज़वान शेख के इस बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन वार्ता की सफलता पूरी तरह उन पक्षों पर निर्भर करेगी जो बातचीत में शामिल हैं।

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