प्रदेश में स्लीपर और ठेका बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। अब से जो बसें सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन बसों को जब्त भी किया जाएगा। यह निर्देश परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने प्रदेश के सभी परिवहन अधिकारियों को जारी किए हैं, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज एक मामले के बाद लिए गए हैं।
सभी स्लीपर बसों में लागू होंगे कड़े सुरक्षा मानक
सभी स्लीपर बसों में तय सुरक्षा मानकों को तुरंत लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले के तहत, केंद्रीय सड़क अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों का पालन करना जरूरी होगा। बसों के चालक के केबिन में लगे विभाजन द्वार को हटाने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि यह हादसे की स्थिति में यात्रियों के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। इसके अलावा, बसों में लगे स्लाइडर को हटाने का निर्देश भी जारी किया गया है।
सभी स्लीपर बसों में अब अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य होगा। बस संचालकों को एक महीने का समय दिया गया है ताकि वे बसों में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र लगवाएं, और इसकी नियमित जांच भी करवाई जाए। इसके साथ ही, जिन बसों को बाड़ी चेसिस से तय सीमा से अधिक बढ़ाया गया है, उन्हें तुरंत सड़क से हटा दिया जाएगा।
बसों के पंजीकरण में कड़े नियम
अब प्रदेश में सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण केवल प्रपत्र 22 और 22 पर ही किया जाएगा। पंजीकरण से पहले मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसी से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बस का पूरा लेआउट ड्राइंग, जिसमें माप, दरवाजों की स्थिति, आपातकालीन निकासी और हैच का विवरण होगा, देना आवश्यक होगा। बस बाड़ी निर्माता की मान्यता भी जांची जाएगी।
सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई
यह आदेश सभी बस संचालकों को सुरक्षा के मानकों का पालन करने के लिए सख्त चेतावनी देता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शुक्रवार तक इस संबंध में रिपोर्ट परिवहन आयुक्त को भेजें।













