Tamil Nadu Assembly Election: तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा का प्रभाव कोई नया नहीं है। एमजीआर और जयललिता जैसे सितारों ने इस राज्य में सत्ता के शिखर तक का सफर तय किया। अब एक बार फिर यही परंपरा अभिनेता विजय के जरिए लौटती दिख रही है। अभिनेता विजय ने अपनी नई पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ सियासी मैदान में उतरकर पुराने दलों की नींद उड़ा दी है।
डीएमके की सत्ता, लेकिन चुनौती बरकरार
इस साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन सत्ता बचाने की कोशिश में हैं। हालांकि डीएमके के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि पार्टी ने लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते हों। पिछले पांच वर्षों में स्टालिन सरकार को विपक्ष की कमजोरी का फायदा मिला। अन्नाद्रमुक (AIADMK) जयललिता के निधन के बाद नेतृत्व संकट और गुटबाजी से जूझती रही।
एआईएडीएमके की वापसी की कोशिश
अब एआईएडीएमके एडप्पादी के. पलानीस्वामी (Edappadi K Palaniswami) के नेतृत्व में खुद को संभालने की कोशिश कर रही है। पार्टी संगठनात्मक रूप से पहले से अधिक मजबूत दिख रही है, लेकिन विजय की एंट्री ने उसके लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
विजय और TVK का सियासी असर
51 वर्षीय विजय ने रजनीकांत और कमल हासन से अलग राह चुनी। जहां दोनों सितारे राजनीति में ठोस कदम नहीं उठा सके, वहीं विजय ने सही समय पर पार्टी बनाकर मैदान में उतरने का फैसला किया। शुरुआती आकलनों में TVK को 10 से 15 प्रतिशत तक वोट शेयर मिलने की संभावना जताई जा रही है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे और ज्यादा मान रहे हैं।
किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि TVK किसका वोट काटेगी। विजय के ईसाई समुदाय से होने के कारण यह चर्चा तेज है कि क्या इससे डीएमके के अल्पसंख्यक वोट बैंक पर असर पड़ेगा। राज्य में ईसाई आबादी करीब 7 प्रतिशत है। वहीं, युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में विजय की जबरदस्त लोकप्रियता एआईएडीएमके के लिए भी खतरे की घंटी है।














