Uttar-Pradesh: जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के विवाद को लेकर आज सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। यह मामला इस समय जिले के सबसे चर्चित और संवेदशील मामलों में एक बन चुका है। विवाद की शुरूआत तब हुई थी जब कुछ स्थानीय व्यक्तियों ने दावा किया कि जामा मस्जिद के स्थान पर पहले हरिहर मंदिर स्थित था, और धार्मिक एंव ऐतिहासिक दृष्टि से महत्व की जगह माना जाता था। हालांकि इस मामले में स्टे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है।

बता दें, इस विवाद में कैला देवी धाम के महंत समेत आठ लोगों ने वाद दायर किया है। उनका कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से हरिहर मंदिर का था, जिसे मस्जिद के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। इस याचिका में यह भी कहा गया है कि मस्जिद को हटाकर हरिहर मंदिर की जगह पर मंदिर का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए, क्योंकि यह स्थान हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है और वहां एक धार्मिक स्थल के रूप में पूजा की जाती रही है।

वहीं दूसरी ओर, मस्जिद प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से मस्जिद का है और यहां वर्षों से नमाज अदा की जा रही है। उनका कहना है कि यह विवाद न केवल धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला है, बल्कि इसे कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, जिससे दोनों समुदायों के बीच शांति बनी रहे।

इस मामले की सुनवाई चंदौसी स्थित जिला न्यायालय में बृहस्पतिवार को की जाएगी। सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई में कोर्ट इस विवाद पर अपना निर्णय सुनाएगा कि क्या मस्जिद का अधिकार वैध है या फिर यह स्थान हरिहर मंदिर का हिस्सा था। इस सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों के वकील पूरी तरह से तैयार हैं और अपनी-अपनी दलीलें पेश करने के लिए कोर्ट में मौजूद होंगे।

बता दें, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह विवाद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला न केवल हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि यह भविष्य में इसी तरह के अन्य विवादों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

इस सुनवाई के बाद इस मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय आने की संभावना है, जो भविष्य में ऐसे अन्य विवादों को सुलझाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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