रूस का नया पैसेंजर टर्बोप्रॉप विमान, इल्यूशिन II-114-300, जिसे पहले ही भारत को पेश किया जा चुका है, जनवरी के अंत में हैदराबाद में होने वाले विंग्स इंडिया एयर शो में एसजे-100 रीजनल जेट के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी भारत की सबसे बड़ी सिविल एविएशन शो है, जिसमें इन दोनों एयरक्राफ्ट को भारतीय कमर्शियल और स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट मार्केट में प्रवेश के लिए रूस की नई कोशिश के रूप में दिखाया जाएगा।
बता दें, रूस के सुखोई ने पहले ही भारत में एसजे-100 के जॉइंट प्रोडक्शन के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ करार किया है। वहीं, इल्यूशिन II-114-300 प्रोग्राम के लिए भारतीय साझेदारी को तलाशने की कोशिश की जा रही है। रूस के मैन्युफैक्चरर ने भारतीय रीजनल एविएशन और सरकारी फ्लीट की जरूरतों को पूरा करने के लिए एयरक्राफ्ट को लोकल असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग के साथ तैयार करने की योजना बनाई है।
वहीं, इल्यूशिन II-114-300, रूस का सबसे नया ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप विमान है, जिसे कम और मीडियम दूरी के रीजनल रूट्स के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह विमान विशेष रूप से कठिन ऑपरेटिंग वातावरण के लिए तैयार किया गया है और इसे टर्बोप्रॉप फ्लीट्स के मॉडर्न रिप्लेसमेंट के तौर पर पेश किया जा रहा है। यह विमान क्लिमोव TV7-117ST-01 इंजन से चलता है और इसमें लगभग 64-68 पैसेंजर बैठ सकते हैं।
हालांकि, यह भी बताया गया है कि II-114-300 अपने डिज़ाइन किए गए ऑपरेशनल पैरामीटर्स को 2028 तक पूरा करेगा, जिसका मतलब है कि यह विमान सर्विस में आने के बाद लगभग दो साल तक पूरी क्षमता पर काम नहीं करेगा। इसका मतलब यह है कि विमान के सर्टिफिकेशन और इंडक्शन में दो साल का वक्त और लगेगा, और ऑपरेशनल भरोसे और परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन में सुधार की जरूरत होगी।
वहीं, विंग्स इंडिया एयर शो में इल्यूशिन II-114-300 को भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना के प्रतिनिधियों को भी दिखाया जाएगा। इस विमान को एक वर्सेटाइल स्पेशल मिशन प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो सिग्नल इंटेलिजेंस और एयरबोर्न अर्ली वार्मिंग रोल में काम आ सकता है। इसके अलावा, II-114-300 को सरफेस सर्च रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, सोनोबॉय सिस्टम और मिशन कंसोल के साथ एडॉप्ट किया जा सकता है, जो इसे मैरीटाइम पेट्रोल, इकोलॉजिकल मॉनिटरिंग और सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशन के लिए एक प्रभावी विकल्प बनाता है।
भारत में चल रहे UDAN कनेक्टिविटी प्रोग्राम और स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट की बढ़ती आवश्यकता के बीच, II-114-300 रूस के लिए भारतीय एविएशन इकोसिस्टम में फिर से प्रवेश करने का एक बड़ा मौका है। यह विमान न केवल लोकल मैन्युफैक्चरिंग पोटेंशियल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का अवसर प्रदान करता है, बल्कि सिविल और मिलिट्री दोनों डोमेन में अपनी भूमिका भी निभा सकता है।



