नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन तो हो गया, लेकिन सीबीआई की ओर से जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध न करा पाने की वजह से सुनवाई रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जांच एजेंसी ने इस मामले में करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन कुछ अहम दस्तावेज और बयानों की सूची अब तक अदालत को नहीं सौंपी जा सकी है। इस पर विशेष न्यायाधीश अनु गोयल बलीगा ने सीबीआई को तीन दिन के भीतर सभी जरूरी कागजात और बयानों की लिस्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है और अगली सुनवाई के लिए तीन अगस्त की तारीख तय की है।
क्या है चार्जशीट में?
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि पेपर लीक की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया गया है। एजेंसी के मुताबिक, प्रश्नपत्र बनाने वाले विशेषज्ञों से लेकर बिचौलियों और लाभार्थी अभ्यर्थियों तक—पूरी चेन का पता लगा लिया गया है। हालांकि, चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के किसी अधिकारी या किसी सरकारी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। इस मामले में हाल ही में नियुक्त विशेष लोक अभियोजक वीके पाठक और अर्जुन आनंद सीबीआई की तरफ से पैरवी करेंगे।
कितने सबूत जुटाए गए?
चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपियों के खिलाफ 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य जुटाए गए हैं। जांच के लिए 72 अधिकारियों और कर्मचारियों की कई टीमें बनाई गईं, जिनके साथ आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी लगाए गए। दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा समेत कई राज्यों में 92 ठिकानों पर छापे मारकर डिजिटल उपकरण और जरूरी दस्तावेज जब्त किए गए। साथ ही आरोपियों के कई बैंक खाते, लॉकर और एक डीमैट खाता भी फ्रीज कर दिया गया है।














