लंदन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़ (SOAS) के सेंटर फॉर ईरानी स्टडीज़ (CIS) के ईरान विशेषज्ञ बुर्जीन वाघमार ने ईरान और अमेरिका के बीच कथित बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया गया और वास्तविक स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।
बता दें, वाघमार ने कहा कि पाकिस्तान ने इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका को जरूरत से ज्यादा प्रचारित किया। उनके अनुसार पाकिस्तान, जिसे अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनात्मक नजर से देखा जाता है, खुद को एक जिम्मेदार मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी स्थिति राजनीतिक छवि सुधारने का प्रयास भी हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर शुरुआत से ही संदेह था। उनके अनुसार अमेरिकी पक्ष का रुख स्पष्ट रहा है कि ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं तेहरान की ओर से भी न्यूक्लियर एनरिचमेंट रोकने की शर्त को पूरी तरह मानने से इनकार किया गया है।
बता दें, वाघमार ने दावा किया कि हालांकि ईरान न्यूक्लियर हथियारों की कोशिश से इनकार करता है, लेकिन 60 प्रतिशत यूरेनियम एनरिचमेंट जैसे स्तर अंतरराष्ट्रीय चिंता का कारण बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और पूर्व वार्ताओं के दौरान कई ऐसे संकेत मिले हैं जिससे भरोसे की कमी और बढ़ी है।
उन्होंने आगे कहा कि बातचीत केवल न्यूक्लियर मुद्दे तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय भी शामिल हैं। वाघमार के अनुसार ईरान इन मुद्दों को अपने क्षेत्रीय प्रभाव से जोड़कर देखता है जबकि पश्चिमी देश इसे स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं।
वहीं, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उन्होंने कहा कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है और किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि समुद्री अधिकारों को लेकर ईरान के कुछ दावे विवादित हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून इसके अलग नियम तय करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आ रही हैं, जिससे तनाव की स्थिति बनी हुई है। वाघमार ने माना कि मौजूदा हालात में बातचीत आगे बढ़ेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाल की बातचीत पिछले एक साल में सबसे लंबी और महत्वपूर्ण वार्ता थी, हालांकि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है।














