पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा करने वाली संस्था भारतीय पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के फंडिंग में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, आई-पैक ने एक ऐसी कंपनी से 13.5 करोड़ रुपये का लोन लिया था, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। यह मामला तब सामने आया जब इस फंडिंग ट्रांजेक्शन की जांच की गई और यह पाया गया कि जिस कंपनी से लोन लिया गया, वह कंपनी कानूनी रूप से पंजीकृत ही नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, यह कंपनी I-PAC के लोन दावों के अनुसार, I-PAC के लिए एक प्रकार से फंडिंग का स्रोत बनी थी। हालांकि, जब इस कंपनी के पंजीकरण और अन्य कानूनी दस्तावेजों की जांच की गई, तो यह पाया गया कि यह कंपनी न तो किसी सरकारी रजिस्टर में पंजीकृत है और न ही किसी प्रकार के कानूनी प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त है। इसके बाद जांच अधिकारियों ने इस मामले को और गंभीरता से लिया है।
बता दें, I-PAC द्वारा इस लोन की मांग और फिर उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं पाई गई हैं। इस मामले में कागजी कार्रवाई, दस्तावेजों की कमी और लोन ट्रांजेक्शन के अस्पष्ट विवरणों के कारण जांच अधिकारियों ने संदेह जताया है। इस फंडिंग से संबंधित कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब I-PAC को देना होगा।
बता दें, I-PAC का नाम भारतीय राजनीति में कई विवादों से जुड़ा हुआ है। यह संगठन राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान चलाने के लिए जाना जाता है। अब यह लोन मामला इस संगठन की वैधता और वित्तीय प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। इस मामले से जुड़े कई राजनीतिक और कानूनी सवाल उठ रहे हैं, जो भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
I-PAC की फंडिंग और लोन प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं ने इसे एक नए विवाद में घेर लिया है। इस मामले की जांच अब जारी है और इस पर आगामी दिनों में और अधिक जानकारी सामने आ सकती है। यह मामला भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच सकता है, जहां इसके असर और परिणामों का भविष्य में सामना करना पड़ेगा।














