Bank Fraud Money Refund:  बैंक खातों से ठगी के मामलों में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने साफ कहा है कि अगर खाताधारक की कोई गलती नहीं है और ओटीपी साझा नहीं किया गया, तो बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर पूरी रकम लौटानी होगी।

आरबीआई सर्कुलर को किया गया स्पष्ट

यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक के वर्ष 2017 के सर्कुलर के आधार पर दिया गया है। आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष जस्टिस एपी शाही और सदस्य भरत कुमार पांड्या शामिल थे, ने बैंक की अपील को खारिज करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया।

बैंकिंग सिस्टम की खामी मानी गई वजह

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जिस समय खातों से लेनदेन हुआ शाम 7 बजे से लेकर रात 12 से 1 बजे के बीच—वह अपने आप में संदेह पैदा करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो बैंकिंग सिस्टम में खामी थी या फिर किसी प्रकार की हैकिंग हुई थी। ऐसे में जिम्मेदारी बैंक की बनती है, न कि खाताधारक की।

तुरंत सूचना देने के बावजूद बैंक असफल रहा

आयोग ने यह भी कहा कि खाताधारक ने जैसे ही खाते में गड़बड़ी देखी, तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दी। इसके बावजूद बैंक खाताधारक की रकम का “कुशल संरक्षक”बनने में विफल रहा। यह बैंक सेवा में गंभीर कमी का मामला है।

क्या था पूरा मामला

यह मामला इंडसइंड बैंक से जुड़ा है। बेंगलुरु की रहने वाली खाताधारक सरोजा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बैंक खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट से कुल 9 लाख 52 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। पहले जिला उपभोक्ता फोरम और फिर राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी महिला के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ बैंक ने राष्ट्रीय आयोग में अपील की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

ओटीपी साझा न होने पर बैंक की जिम्मेदारी तय

आयोग ने साफ कहा कि बैंक यह साबित करने में असफल रहा कि खाताधारक ने वन टाइम पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा किया था। ऐसे मामलों में आरबीआई सर्कुलर का क्लॉज 6(ए) लागू होता है, जिसमें खाताधारक की “शून्य देयता” तय की गई है।

10 कार्य दिवस में पैसा लौटाना अनिवार्य

आयोग ने दो टूक कहा कि जब खाताधारक की कोई गलती नहीं हो, तो बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर खाते से निकली पूरी रकम वापस करनी होगी। यह फैसला भविष्य में बैंकिंग फ्रॉड मामलों में उपभोक्ताओं के लिए एक मजबूत मिसाल बनेगा।

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