भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अमेरिका की विदेश नीति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विदेश नीति पर निर्णय लेने का तरीका काफी अलग है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश नीति केवल इस तरह से नहीं चलती, जैसे ट्रंप और उनकी सरकार इसे करती है। उनका यह बयान अमेरिका की विदेश नीति पर एक कड़ी टिप्पणी के रूप में सामने आया है, जो समय-समय पर असंगत नजर आती है।

बता दें, इस बीच पिछले तीन दिनों में भारत को लेकर ट्रंप के बयानों में बदलाव देखने को मिला है। 6 जनवरी 2026 को ट्रंप ने दावा किया था कि भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन किया और सम्मानजनक तरीके से बात की। उनका कहना था कि मोदी ने उनसे पूछा था, “सर, क्या मैं आ सकता हूँ?” यह बयान ट्रंप ने यह दिखाने के लिए दिया कि उनकी टैरिफ नीति काम कर रही है और अब दुनिया के बड़े नेता उनके सामने झुक रहे हैं।

लेकिन तीन दिन बाद, 9 जनवरी को अमेरिका के वाणिज्य विभाग के सचिव हावर्ट लुटनिक ने ट्रंप के बयानों को पूरी तरह से उलट दिया। लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता होने वाला था, लेकिन वह टूट गया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति को फोन नहीं किया। लुटनिक के अनुसार, भारत ने उस मौके को खो दिया और अब अमेरिका ने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ समझौते कर लिए हैं।

यह विरोधाभास कई कारणों से हो सकता है। ट्रंप विदेशी नेताओं से अपने व्यक्तिगत संबंधों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हैं ताकि वह अपने घरेलू वोटरों को यह दिखा सकें कि वह एक “स्ट्रॉन्ग मैन” हैं। वहीं, हावर्ड लुटनिक जैसे उनके अधिकारी शुद्ध रूप से व्यापारिक दृष्टिकोण से काम करते हैं और “लेन-देन” की भाषा बोलते हैं। लुटनिक का बयान साफ करता है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति अपनाता है, यानी जो जल्दी आएगा, उसे अच्छा सौदा मिलेगा।

बता दें, अमेरिका का यह दबाव भारत पर नहीं चल पाया। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह के दबाव में समझौता नहीं करेगा, विशेष रूप से तब जब अमेरिका उसे रूस से संबंधों के बारे में धमकी दे रहा हो। अमेरिका के सख्त रुख ने भारत को सतर्क कर दिया है और यह संभावना जताई जा रही है कि भारत अब चीन के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने और व्यापारिक रिश्तों को संतुलित करने के लिए नए प्रयास कर सकता है।

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