उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (JPNIC) को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक बड़ा खुलासा करते हुए अखिलेश यादव के कार्यकाल पर तीखा निशाना साधा है और इसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाला प्रोजेक्ट करार दिया है। ब्रजेश पाठक का कहना है कि प्रदेश की जनता को JPNIC की असली सच्चाई जरूर जाननी चाहिए, क्योंकि इसमें जनता के गाढ़े कमाई के पैसों का भारी दुरुपयोग किया गया है।
डिप्टी सीएम ने खुलासा किया कि मूल रूप से 200 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर कागजों और काम के नाम पर भारी-भरकम 864 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद JPNIC का प्रोजेक्ट अधूरा ही रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के संचालन को निजी हाथों में सौंपने की सुनियोजित योजना बनाई गई थी और इसके लिए जो संचालन समिति बनाई गई थी, उसमें खुद अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव के अलावा वासिफ हसन भी सदस्य के रूप में शामिल थे। पाठक ने कड़े शब्दों में कहा कि यह सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति पर निजी कब्जा जमाने की कोशिश थी।
ब्रजेश पाठक ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि पहले इसे निजी तौर पर संचालित करने की साजिश थी, लेकिन अब JPNIC को लीज पर दिया गया है जबकि इसका वास्तविक मालिकाना हक पूरी तरह से सरकार के पास सुरक्षित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी संपत्ति हमेशा राज्य सरकार की ही रहती है और किसी को भी इस तरह के भ्रष्टाचार या कब्जे की छूट नहीं दी जाएगी। इस खुलासे के बाद से राज्य की राजनीति में सियासी उबाल आ गया है।










