डेस्क : कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की दोस्ती को ‘जय-वीरू’ की जोड़ी कहा जाता था, लेकिन अब दोनों नेताओं के बीच सियासी दूरी खुलकर सामने आने लगी है। अखिलेश यादव के एक बयान के बाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए कहा, “चवन्नी को रुपया बनाया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।” उनके इस बयान को जयंत चौधरी के NDA में शामिल होने से जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश के इस तंज में पुराने सहयोगी के प्रति नाराजगी साफ नजर आई।
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सपा और RLD के बीच गठबंधन था
दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सपा और RLD के बीच गठबंधन था। दोनों दलों ने मिलकर चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति बनाई थी, लेकिन बाद में जयंत चौधरी NDA के साथ चले गए। इसके बाद दोनों नेताओं के रिश्तों में सियासी खटास बढ़ती गई। अखिलेश के बयान पर राष्ट्रीय लोकदल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। RLD ने इसे अपमानजनक टिप्पणी बताते हुए इसकी निंदा की। पार्टी का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी मजबूत दोस्ती के तौर पर देखे जाने वाले अखिलेश और जयंत के रिश्ते अब आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गए हैं। आने वाले समय में यह सियासी टकराव कितना बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।













