उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले पर कांग्रेस द्वारा इसे दलित विरोधी मानसिकता से जोड़े जाने के बाद, अब शुद्धिकरण कराने वाले संगठन ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ ने कड़ा रुख अपनाते हुए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने इसे राजनीतिक लाभ और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास बताया है।
क्या है पूरा मामला और संगठन की सफाई?
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे ने स्पष्ट किया है कि मैदान के शुद्धिकरण का उद्देश्य किसी भी जाति या समुदाय को निशाना बनाना कतई नहीं था। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान मूल रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए निर्धारित है, लेकिन वहां राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भावनाओं से जुड़े नारे भी लगाए गए और जब रैली समाप्त हुई, तो मैदान में भारी गंदगी के साथ-साथ पेशाब से भरी बोतलें भी बिखरी मिलीं।
गिरीश पांडे ने बताया कि आयोजन के बाद संगठन के लोगों ने पहले खुद मैदान की साफ-सफाई की और उसके बाद उसकी पवित्रता पुनः स्थापित करने के लिए यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस धार्मिक अनुष्ठान में अनुसूचित जाति समाज के लोग भी पूरी श्रद्धा के साथ सहभागी रहे, इसलिए पूरे आयोजन को ‘दलित विरोधी’ बताना पूरी तरह से निराधार और तथ्यों से परे है।
कांग्रेस पर भावनाएं भड़काने का आरोप
संगठन का कहना है कि कांग्रेस पार्टी इस धार्मिक अनुष्ठान को बेवजह राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। उनका मकसद समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करना और लोगों की भावनाओं को भड़काना है। यज्ञ के दौरान अनुसूचित जाति समाज से जुड़े अंकित पाल, नंदकिशोर आर्य, विनोद आर्य और मोहित आर्य सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद थे।
श्री राम सेना ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यज्ञ का एकमात्र उद्देश्य मैदान की स्वच्छता और उसकी धार्मिक पवित्रता को बनाए रखना था, न कि किसी व्यक्ति, जाति या समुदाय का अपमान करना। संगठन ने कांग्रेस से मांग की है कि धार्मिक स्थल की पवित्रता भंग होने के मामले में वह राजनीति करने के बजाय आत्ममंथन करे। इस तीखे बयानबाजी के बाद क्षेत्र का राजनीतिक पारा काफी चढ़ गया है।















