सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की पुलिस और कानून व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति के लापता या गुमशुदा होने की सूचना मिलते ही पुलिस को बिना किसी देरी के तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करनी होगी। शीर्ष अदालत का यह निर्देश किसी खास उम्र या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति पर लागू होता है—चाहे वह कोई बच्चा हो, बुजुर्ग हो, महिला हो या पुरुष।
कोर्ट ने पूर्व में दिए गए अपने एक आदेश का हवाला देते हुए स्थिति साफ की कि उसमें इस्तेमाल किए गए “व्यक्ति” शब्द को केवल बच्चों के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। इस शब्द के दायरे में समाज का हर नागरिक आता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस प्रशासन को इस आदेश का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है।
इसके साथ ही अदालत ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है कि जो भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश इस निर्देश की अनदेखी करेगा या लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ सीधी अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू की जाएगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य गुमशुदगी के मामलों में पुलिसिया हीला-हवाली को खत्म करना और समय रहते व्यक्ति की तलाश शुरू कराना है।











