भारत की BRICS प्रेसीडेंसी के तहत साल 2026 में आयोजित BRICS कल्चर वर्किंग ग्रुप (CWG) की बैठकों में सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने, सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करने और तेजी से बदलते डिजिटल माहौल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक इस्तेमाल से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया गया है। इन बैठकों के मुख्य निष्कर्षों को केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब के जरिए साझा किया।
इस साल हुई बैठकों में मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों—सांस्कृतिक सहयोग, क्रिएटिव इकोनॉमी में कॉपीराइट और एथिकल AI, सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा, और कल्चरल प्रॉपर्टी की वापसी—पर विचार-विमर्श किया गया। डिजिटल युग में कलाकारों, रचनाकारों और सांस्कृतिक पेशेवरों के अधिकारों की रक्षा करने पर जोर देते हुए सदस्य देशों ने बौद्धिक संपदा फ्रेमवर्क को मजबूत करने और क्रिएटर्स के लिए उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वाराणसी में हुई दूसरी बैठक और यूनेस्को नॉमिनेशन पर चर्चा
बैठकों के सिलसिले में पहली वर्चुअल बैठक का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया था, जिसकी अध्यक्षता मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने की। इसमें रूस, दक्षिण अफ़्रीका, इथियोपिया, इंडोनेशिया, यूएई, ईरान, चीन और ब्राजील के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वहीं, दूसरी बैठक 5 जून को वाराणसी में संपन्न हुई, जिसमें सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संस्थागत सहयोग बढ़ाने और यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज व इनटैंजिबल कल्चरल हेरिटेज प्रोग्राम के तहत संयुक्त नामांकन पर भी चर्चा की गई।
2026 की थीम और भारत की भूमिका वर्ष 2026 के लिए भारत की BRICS चेयरशिप की थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखी गई है। बैठकों के दौरान जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास को बढ़ावा देने में पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति की भूमिका पर भी विस्तार से बात हुई। वर्तमान में BRICS दुनिया के 11 प्रमुख उभरते बाजारों और विकासशील देशों को एक मंच पर लाता है, जो वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी सहयोग का एक मजबूत माध्यम है।














