नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले के विरोध में 27 दिनों से अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुवार रात अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह रात करीब 12:30 बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां जेपी नड्डा ने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।
वही सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर बताया कि लंबी बातचीत और कुछ शर्तों पर सहमति बनने के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार से लिखित भरोसा चाहिए था, जिसे मिलने में दो दिन का समय लगा।
सरकार ने दिए ये आश्वासन
सोनम वांगचुक के मुताबिक, सरकार की ओर से उन्हें कुछ मुद्दों पर लिखित आश्वासन दिया गया है।
- जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले और 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल छात्रों व युवाओं पर कोई FIR या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- नीट पेपर लीक मामले में जान गंवाने वाले 20 से ज्यादा छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
- नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर संसद में विस्तृत चर्चा और बहस होगी।
इसके अलावा 65 सांसदों ने भी अलग से हस्ताक्षर कर सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की थी और संसद में इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दिया था।
संभावित हिंसा को देखते हुए लिया फैसला
आगे सोनम वांगचुक ने कहा कि देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए भी उन्होंने अनशन खत्म करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे जरूरी था कि छात्रों पर कार्रवाई न हो और मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा मिले।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक ?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आश्वासन नहीं मिला है।उन्होंने कहा कि उनके पास दो विकल्प थे- या तो वह लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रखते, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता था, या फिर छात्रों के हित में फैसला लेते।
वांगचुक ने कहा कि अगर शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो इससे छात्रों या आंदोलन को नुकसान नहीं होगा, बल्कि सरकार को नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस्तीफा पहले ही दे दिया जाता तो स्थिति और बेहतर हो सकती थी।उन्होंने कहा कि अब संसद में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही को लेकर चर्चा होगी, जो लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।













