नई दिल्ली/मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के प्रमोटर ग्रुप ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान खुले बाजार से शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिसे देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का मजबूत संकेत माना जा रहा है।
कितनी बढ़ी प्रमोटरों की हिस्सेदारी?
रेगुलेटरी शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, जून तिमाही के अंत में प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 50.48 प्रतिशत हो गई, जो तीन महीने पहले जनवरी-मार्च तिमाही में लगभग 50 प्रतिशत थी। यह पूरी खरीदारी सेबी के ‘क्रीपिंग एक्विजिशन’ नियमों के तहत की गई, जिसके अंतर्गत प्रमोटर तय सीमा में रहते हुए बिना अनिवार्य ओपन ऑफर लाए धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस शेयर खरीद पर प्रमोटर ग्रुप ने 8,500 करोड़ से 9,000 करोड़ रुपये के बीच खर्च किए होंगे।
किसके पास कितने शेयर?
कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग डेटा के मुताबिक, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी, उनकी पत्नी और तीनों बच्चे ईशा, आकाश और अनंत—प्रत्येक के पास कंपनी के 1.61 करोड़ शेयर हैं, यानी हर एक की 0.12 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं, उनकी मां के.डी. अंबानी के पास 3.14 करोड़ शेयर (0.24 प्रतिशत) हैं। शेष शेयर प्रमोटर ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के पास हैं, जिनमें श्रीचक्र कमर्शियल्स LLP के पास सर्वाधिक 10.93 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि देवर्षि कमर्शियल्स LLP, करुणा कमर्शियल LLP और तत्त्वम एंटरप्राइजेज LLP में से प्रत्येक के पास 8.06 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
क्या है इसका संकेत?
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रिलायंस अपने रिटेल, डिजिटल, नई ऊर्जा और कंज्यूमर बिजनेस में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। आमतौर पर प्रमोटरों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाने को कंपनी के भविष्य को लेकर प्रबंधन के गहरे भरोसे के रूप में देखा जाता है। जानकारों का मानना है कि इस कदम का कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह अल्पसंख्यक निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है और रिलायंस की दीर्घकालिक आय वृद्धि तथा भविष्य की पूंजी आवंटन योजनाओं पर प्रमोटरों के भरोसे को दर्शाता है।












