पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में दो भारतीय जहाजों—MT अल बहियाह और MT मोम्बासा—पर हुए हमले ने भारत सरकार को गंभीर चिंता में डाल दिया है। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब किया है।
हमले की भयावहता
इन जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। हमलों के कारण MT अल बहियाह के एक भारतीय क्रू मेंबर की जान चली गई, जबकि दूसरा घायल है। वहीं, MT मोम्बासा पर सवार 18 भारतीयों में से 9 घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यूएई में भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है ताकि घायलों को हर संभव मदद पहुंचाई जा सके।
भारत ने जताई कड़ी नाराजगी
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इन हमलों की कड़ी निंदा की है। प्रवक्ता ने कहा, “हमने ईरानी पक्ष के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कमर्शियल शिपिंग और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।” भारत ने अपील की है कि होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नेविगेशन पूरी तरह सुरक्षित और अबाध होना चाहिए, जो वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
शांति और कूटनीति की अपील
भारत ने तनाव को कम करने के लिए ईरान और अमेरिका को बातचीत की मेज पर आने का सुझाव दिया है। भारत का मानना है कि सैन्य संघर्ष या आक्रामकता का रास्ता शांति नहीं ला सकता। क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीति (Diplomacy) ही एकमात्र विकल्प है।
अंतरराष्ट्रीय हलचल
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वे ईरानी नाकेबंदी को फिर से लागू कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा के लिए ’20 प्रतिशत’ चार्ज करेगा, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग ट्रैफ़िक को बंद नहीं होने दिया जाएगा। भारत की प्राथमिकता फिलहाल अपने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।















