अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर की हलचल ने एक बार फिर सियासी और धार्मिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। ट्रस्ट के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर पिछले कुछ दिनों से तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। मीडिया में यह चर्चा जोरों पर थी कि ट्रस्ट के भीतर बड़े बदलाव होने जा रहे हैं और कुछ खास चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
इसी बीच, चंपत गुट से जुड़े गोपाल राव ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। गोपाल राव ने बेहद तल्ख लहजे में गोविंद गिरी जी महाराज के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बर्खास्तगी की खबरें केवल एक मनगढ़ंत साजिश हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “मैं यहीं राम मंदिर ट्रस्ट में हूं और यहीं रहूंगा। किसी को बाहर नहीं किया गया है, और जो खबरें चल रही हैं, वे पूरी तरह से गलत हैं और समाज में गलत संदेश देने का प्रयास है।”
उनके इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि ट्रस्ट के भीतर ‘चंपत गुट’ अभी भी अपनी स्थिति को लेकर अडिग है और पीछे हटने के मूड में नहीं है। सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट में कामकाज की शैली और भविष्य की रणनीतियों को लेकर अलग-अलग राय बनी हुई है, जिससे अंदरूनी टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। गोपाल राव का यह बयान न केवल उनके समर्थक खेमे के लिए एक बड़ा संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर अभी और मंथन होने की संभावना है। फिलहाल, अयोध्या के संतों और राम भक्तों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रस्ट की आगामी बैठक में कोई औपचारिक समाधान निकलता है या यह विवाद और गहराता जाएगा।














