अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में SIT की कथित गोपनीय रिपोर्ट के लीक होने के बाद कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की बैठक के तुरंत बाद रिपोर्ट की कॉपी व्हाट्सऐप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी गोपनीय रिपोर्ट बाहर कैसे आई और इसे किसने लीक किया?
सूत्रों के मुताबिक, वायरल हुई SIT की शुरुआती जांच रिपोर्ट में दानराशि की गणना प्रक्रिया और कर्मियों की नियुक्ति को लेकर कई अहम बिंदुओं का जिक्र है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि गणना कर्मियों की नियुक्ति सामान्य प्रक्रिया के बजाय सिफारिश और मंजूरी के जरिए हुई थी।
सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज नाम की एजेंसी के माध्यम से लगाया गया था
जानकारी के अनुसार, दानराशि की गणना के लिए कर्मचारियों को सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज नाम की एजेंसी के माध्यम से लगाया गया था। आरोप है कि इन कर्मचारियों के नामों की अनुशंसा ट्रस्ट से जुड़े लोगों की ओर से की गई और बैंक अधिकारियों की मंजूरी के बाद उन्हें काम सौंपा गया। यह एजेंसी वाराणसी के पते पर पंजीकृत बताई जा रही है, जबकि गणना में शामिल अधिकतर कर्मचारी अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
एजेंसी को मंदिर के चढ़ावे जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी गई थी
रिपोर्ट को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि जिस एजेंसी को मंदिर के चढ़ावे जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी गई, उसका मुख्य अनुभव आउटसोर्सिंग और हाउसकीपिंग जैसे कार्यों से जुड़ा था। ऐसे में जांच का केंद्र यह भी है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से पहले पर्याप्त जांच-पड़ताल क्यों नहीं की गई।
चंपत राय के नाम का किसी भी संदर्भ में जिक्र नहीं होने की बात सामने आ रही
वहीं, सूत्रों का दावा है कि SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में पूर्व अकाउंटेंट महिपाल सिंह और पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के वीडियो बयानों का उल्लेख नहीं है। साथ ही रिपोर्ट में चंपत राय के नाम का किसी भी संदर्भ में जिक्र नहीं होने की बात सामने आ रही है। अब इस पूरे मामले में सवाल यह है कि यदि नियुक्तियां सिफारिश और मंजूरी के आधार पर हुई थीं, तो जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाएगी। रिपोर्ट लीक होने के बाद ट्रस्ट के अंदरूनी मतभेदों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि, रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।














