अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने अपने वर्कफोर्स में कटौती का बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने करीब 4,800 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जो कि कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 2.1 फीसदी है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब टेक सेक्टर पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में शामिल हो गया है।
AI पर भारी निवेश की कीमत
बड़ी टेक कंपनियां 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 700 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करने की तैयारी में हैं। माइक्रोसॉफ्ट भी इसमें पीछे नहीं है। कंपनी के Azure Cloud कारोबार को AI से फायदा तो मिल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने की लागत कंपनी के कैश फ्लो पर गंभीर दबाव डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI के माध्यम से अब कई पारंपरिक सॉफ्टवेयर और कारोबारी कार्यों को ऑटोमेट किया जा रहा है, जिसका सीधा असर वर्कफोर्स की संख्या पर पड़ रहा है।
शेयर और खर्च का दबाव
माइक्रोसॉफ्ट के लिए साल 2026 की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण रही है। इस साल कंपनी का शेयर करीब 23 फीसदी गिर चुका है, जो 2022 के बाद उसका सबसे खराब प्रदर्शन है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में करीब 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान जारी किया है, जो बाजार विशेषज्ञों की उम्मीदों से काफी अधिक है। इन बढ़ते खर्चों के बीच माइक्रोसॉफ्ट पर निवेशकों का दबाव बढ़ गया है कि वे AI से बेहतर रिटर्न हासिल करें।
छंटनी का सिलसिला जारी
यह पहला मौका नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट ने छंटनी का सहारा लिया है। इससे पहले 2026 में ही कंपनी ने 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेपरेशन का ऑफर दिया था। माइक्रोसॉफ्ट हर साल जून में वित्त वर्ष खत्म होने के बाद अपनी परिचालन लागत और बजट को संतुलित करने के लिए वर्कफोर्स में बदलाव करती है।
भविष्य की राह
Azure और OpenAI के AI मॉडल्स पर कंपनी का दांव बहुत बड़ा है। हालांकि, मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों और Xbox जैसे कंसोल की कमजोर मांग के बीच, माइक्रोसॉफ्ट के लिए मुनाफा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या AI पर कंपनी का यह भारी निवेश भविष्य में कंपनी को फिर से ऊंचाइयों पर ले जाएगा या छंटनी का यह दौर और लंबा खिंचेगा।















