नई दिल्ली। मटन के शौकीन लोगों की थाली में अक्सर कलेजी, दिमाग, गुर्दा और दिल जैसी चीजें भी शामिल होती हैं, जिन्हें ऑर्गन मीट या ऑफल कहा जाता है। कई लोग इन्हें स्वाद के लिए खाते हैं तो कई इन्हें पोषण का खजाना मानते हैं। सच भी यही है कि इन अंगों में कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं और कुछ लोगों के लिए इनका ज्यादा सेवन फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।
किन लोगों को ऑर्गन मीट से बचना चाहिए?
वेबएमडी के अनुसार, फायदों के बावजूद कलेजी, दिमाग और गुर्दा को रोजाना या जरूरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। खासकर कलेजी और दिल में कोलेस्ट्रॉल काफी अधिक होता है। अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल पहले से बढ़ा हुआ है या उसे दिल की बीमारी का खतरा है तो ज्यादा मात्रा में ऑर्गन मीट खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों को गाउट की समस्या है, उन्हें भी कलेजी, गुर्दा और दूसरे ऑर्गन मीट से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
इनमें प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में यूरिक एसिड बढ़ाकर जोड़ों के दर्द और सूजन की समस्या को और गंभीर बना सकती है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि हीमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को भी ऑर्गन मीट सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए, क्योंकि इस बीमारी में शरीर में पहले से ही आयरन अधिक होता है और आयरन से भरपूर कलेजी जैसी चीजें नुकसान पहुंचा सकती हैं।
फिट लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
एक्सपर्ट की सलाह है कि अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं तब भी ऑर्गन मीट को रोज की डाइट का हिस्सा बनाने के बजाय कभी-कभार और सीमित मात्रा में ही खाएं। वहीं अगर आपको दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल, गाउट या आयरन ओवरलोड जैसी कोई समस्या है तो इन्हें खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। स्वाद के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।
ऑर्गन मीट के फायदे भी हैं कमाल
एक्सपर्ट के अनुसार, कलेजी, गुर्दा और दिल में विटामिन बी12, आयरन, जिंक और कई बी-विटामिन अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं। यही वजह है कि जिन लोगों में आयरन की कमी होती है, उनके लिए सीमित मात्रा में कलेजी फायदेमंद मानी जाती है। इससे शरीर में आयरन का स्तर बढ़ सकता है और कमजोरी या थकान जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। कलेजी में मौजूद विटामिन बी1 और अन्य पोषक तत्व दिमाग की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, जबकि विटामिन बी2 शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के साथ कुछ प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करने में भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, दिल, कलेजी और गुर्दे में पाया जाने वाला विटामिन बी12 और फोलेट रक्त में होमोसिस्टीन के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है।
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई डाइट या बदलाव को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।















