उत्तर प्रदेश के सरकारी महकमों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मानव संपदा पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण दर्ज न कराने वाले राज्य कर्मचारियों के खिलाफ मुख्य सचिव ने सीधे तौर पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि संपत्ति का ब्योरा छिपाने वाले या लापरवाही बरतने वाले ऐसे किसी भी कार्मिक को वर्तमान चयन वर्ष में न तो पदोन्नति दी जाएगी और न ही उनकी सुनिश्चित वित्तीय स्तरोन्नयन के दावों पर विचार किया जाएगा। इतना ही नहीं, इन दागी और डिफॉल्टर कर्मचारियों को विदेश यात्रा या किसी अन्य विभाग में प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने सभी कमिश्नर, DM और विभागाध्यक्षों को लिखा पत्र
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने इस कड़ी कार्रवाई के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, कार्यालयाध्यक्ष, कमिश्नर और जिलाधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि जिन कार्मिकों ने 10 मार्च 2026 की विस्तारित अंतिम तिथि तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया है, उनके खिलाफ 19 जून को जारी कड़े निर्देशों के तहत सक्षम स्तर से मंजूरी लेकर तुरंत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाए।
वेतन आहरण के लिए एनआईसी की मंजूरी होगी जरूरी
सरकार ने इन कर्मचारियों को आर्थिक रूप से भी घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। आदेश के मुताबिक, विभागों द्वारा दोषी कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की डिजिटल सूचना वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी एके रावत और मानव संपदा प्रोजेक्ट प्रभारी को भेजी जाएगी।
वेतन रोकने का नया नियम: एनआईसी द्वारा उक्त संबंधित कार्मिक के विरुद्ध कार्यवाही की सूचना पोर्टल पर दर्ज होने के बाद ही मानव संपदा पोर्टल पर वेतन आहरण की विशेष तकनीकी व्यवस्था अनलॉक की जाएगी। इसके बाद ही संबंधित आहरण वितरण अधिकारी उस कर्मचारी का वेतन जारी कर पाएंगे। यानी जब तक विभागीय कार्यवाही की रिपोर्ट पोर्टल पर अपडेट नहीं होगी, तब तक कर्मचारी को सैलरी नहीं मिल सकेगी।
अभी भी रडार पर हैं 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने संपत्ति का ब्योरा देने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया था, तब तक 47,816 कार्मिकों ने अपनी संपत्तियों का ब्योरा नहीं भरा था। बाद में इसे बढ़ाकर 10 मार्च तक का अंतिम मौका दिया गया था। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, तमाम मोहलत के बावजूद अभी भी राज्य में 30 हजार से अधिक ऐसे कार्मिक हैं जिन्होंने निर्धारित तिथि तक अपनी संपत्तियों का विवरण दर्ज नहीं कराया है। अब इन सभी कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।














