लखनऊ : उत्तर प्रदेश में वाहन चालकों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुड़ी एक बड़ी खबर सूबे की राजधानी लखनऊ से सामने आई है। योगी सरकार द्वारा साल 2017 से 2021 की अवधि के दौरान पेंडिंग पड़े चालानों को राहत देने के लिए चलाई गई ‘चालान माफी योजना’ पर अब संकट के बादल मंडरा गए हैं। माननीय न्यायालय (कोर्ट) ने इस योजना का कड़ा संज्ञान लेते हुए पाया है कि सरकार द्वारा दी गई इस थोक राहत में कई ऐसे गंभीर यातायात उल्लंघन और अपराध के मामले भी शामिल थे, जिन्हें किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जाना चाहिए था।
अदालत की इस कड़ी टिप्पणी और निर्देश के बाद अब उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग एक्शन मोड में आ गया है। कोर्ट ने साफ तौर पर आदेश जारी किया है कि इस पूरी चालान माफी योजना की नए सिरे से विस्तृत समीक्षा की जाए। इस आदेश के अनुपालन में परिवहन विभाग अब उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में एक विशेष जांच समिति (कमेटी) का गठन करने जा रहा है। यह जिला स्तरीय समिति साल 2017 से 2021 के बीच माफ किए गए सभी चालानों के डेटा को दोबारा खंगालेगी।
गंभीर उल्लंघन करने वालों पर गिरेगी गाज, दोबारा होगी कार्रवाई
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य उन मामलों को अलग करना है जो बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। उदाहरण के तौर पर— शराब पीकर गाड़ी चलाना (ड्रंकन ड्राइविंग), तेज रफ्तार या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना जिसके कारण जान-माल का नुकसान हुआ हो, बिना परमिट या फिटनेस के कमर्शियल वाहन दौड़ाना और रेड लाइट जंपिंग के आदतन मामले।
अदालत का स्पष्ट मानना है कि ऐसे गंभीर मामलों को माफ करने से समाज में गलत संदेश जाता है और सड़क सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। परिवहन विभाग की समिति द्वारा जांच पूरी होने के बाद, जितने भी गंभीर मामले पाए जाएंगे, उनकी माफी को रद्द कर दिया जाएगा। यानी ऐसे वाहन स्वामियों को न सिर्फ दोबारा भारी जुर्माना भरना पड़ेगा, बल्कि उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस फैसले के बाद उन रसूखदार और गंभीर यातायात अपराधियों में हड़कंप मच गया है जो चालान माफ कराकर राहत की सांस ले रहे थे।











