वर्ल्ड डेस्क : मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) यानी खाड़ी क्षेत्र से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और बेहद डराने वाली खबर सामने आ रही है। कुवैत पर अचानक भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला हुआ है। कुवैत की सेना के आधिकारिक बयान के मुताबिक, देश की अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्रणाली (वायु रक्षा प्रणाली) आसमान में लगातार “Hostile Missile and Drone Attacks” (दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन हमलों) को इंटरसेप्ट कर उन्हें नष्ट कर रही है। इस अचानक हुए हमले के बाद कुवैत के कई रिहायशी और प्रमुख इलाकों में एयर रेड सायरन बजने लगे हैं, जिससे नागरिकों में दहशत का माहौल है।
कुवैत पर मिसाइल-ड्रोन हमला, एयर डिफेंस ने आसमान में रोके टारगेट; देशभर में सायरन। ईरान ने अमेरिकी हमले का हिसाब कुवैत से लिया।
खाड़ी क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आ रही है। कुवैत की सेना के मुताबिक देश की एयर डिफेंस प्रणाली “hostile missile and drone attacks” को इंटरसेप्ट कर रही… pic.twitter.com/I4BiJxpnZL
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) June 1, 2026
आसमान में ही रोके गए टारगेट, सेना अलर्ट पर
कुवैती सेना ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम देश के हवाई क्षेत्र (Airspace) में अवैध रूप से घुसने की कोशिश कर रहे आत्मघाती ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को नाकाम करने में पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं। देश के सैन्य अधिकारियों ने आम जनता से पैनिक न होने की अपील की है। साथ ही, लोगों से सरकारी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और पूरी तरह सतर्क व सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा गया है।
ईरान ने अमेरिकी हमले का कुवैत से लिया हिसाब!
खाड़ी देशों के विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भीषण हमला उस समय हुआ है जब अमेरिका ने हाल ही में ईरान के अंदर घुसकर उसके रडार सिस्टम और प्रमुख ड्रोन कमांड साइट्स को बमबारी कर तबाह करने की पुष्टि की थी। अमेरिका के इस बड़े एक्शन के तुरंत बाद ईरानी मीडिया ने भी भीषण जवाबी कार्रवाई की चेतावनी और दावा जारी किया था। माना जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका को जवाब देने के लिए कुवैत को निशाना बनाया है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।
खाड़ी क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा गहराया
कुवैत जैसे शांत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश पर मिसाइल और ड्रोन के इस सीधे खतरे ने पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में युद्ध के बादलों को और गहरा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह हमला और तेज होता है, तो इसमें अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की सीधी एंट्री हो सकती है, जो आगे चलकर एक बड़े वैश्विक संकट या महायुद्ध का रूप ले सकती है।















