लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों ‘इंतेहा हो गई इंतजार की’ वाली स्थिति बनी हुई है। पिछले रविवार को राजभवन में मंत्रियों के शपथ लेने के बाद से पूरा एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन अब तक मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है। इस देरी के कारण सत्ता के गलियारों और प्रशासनिक हल्के में बेचैनी का ‘बीपी’ (ब्लड प्रेशर) बढ़ा हुआ है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि विभागों के बंटवारे को लेकर लखनऊ से दिल्ली तक कुछ बिंदुओं पर असहमति बनी हुई है, जिसे सुलझाने की कोशिशें जारी हैं। यूपी की राजनीति में ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब मंत्रियों की घोषणा के बाद पोर्टफोलियो तय करने में इतना लंबा वक्त लग रहा है।
फिलहाल, शपथ ले चुके आठों मंत्री बिना किसी काम के बैठे हैं। उनके पास सुरक्षा का डंडा, गाड़ियों का काफिला, झंडा और दफ्तर तो है, लेकिन आधिकारिक तौर पर करने के लिए कोई काम नहीं है। मंत्री बनने का जो रुआब और उत्साह शुरुआती दिनों में था, वो इस एक हफ्ते के लंबे इंतजार ने थोड़ा ठंडा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब अगले हफ्ते ही विभागों के बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला होने की संभावना है।













