लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के नौकरीपेशा लोगों को जल्द ही एक बड़ी राहत दे सकती है। श्रम विभाग में इन दिनों ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) की नीति को लेकर उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है, जिसके बाद जल्द ही इस पर कोई ठोस फैसला लिया जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रम विभाग की बैठक में लगातार दो दिनों तक ‘वर्क फ्रॉम होम’ के प्रस्ताव पर गहन चर्चा हुई। इस उच्च स्तरीय विचार-विमर्श के पश्चात संभावना जताई जा रही है कि सरकार एक बड़ा निर्णय लेते हुए इसे लागू कर सकती है। बैठक में प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन) डॉ. एम.के. शन्मुगा सुंदरम ने विस्तृत समीक्षा की। चर्चा का केंद्र बिंदु उन संस्थानों पर रहा जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ अनिवार्य रूप से लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
अलग-अलग शिफ्टों और सार्वजनिक परिवहन पर भी जोर
इस अहम बैठक में कार्यालय समय को विभिन्न शिफ्टों में विभाजित करने के विकल्प पर भी मंथन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य कार्यालय आने-जाने के समय यातायात के दबाव को कम करना और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि श्रमिकों और कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस, कार पूलिंग, ट्रेन और अन्य सार्वजनिक परिवहन के साधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
ऊर्जा बचत और स्वास्थ्य पर भी परामर्श
श्रम विभाग ने विभिन्न औद्योगिक कंपनियों, स्टार्टअप और संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर कर्मचारियों को आवश्यकतानुसार घर से काम करने की सुविधा देने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अतिरिक्त, बैठक में मज़दूरों और कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य व पोषण के मद्देनज़र एक अनोखी सलाह भी सामने आई। ऊर्जा एवं संसाधनों की बचत पर जोर देते हुए विभाग ने कम तेल वाले भोजन को अपनाने की सिफारिश की, ताकि कर्मचारियों के समग्र स्वास्थ्य में सुधार हो सके।












