Lucknow: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘बगावत’ और ‘पुरस्कार’ की एक नई इबारत लिखी गई है। समाजवादी पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता और रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडे ने आज योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेकर अपनी नई राजनीतिक पारी का आगाज किया है। लंबे समय तक अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले मनोज पांडे का यह हृदय परिवर्तन यूपी की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
सपा के मुख्य सचेतक से ‘बागी’ तक का सफर
मनोज पांडे केवल एक विधायक नहीं, बल्कि सपा के एक चर्चित चेहरा माने जाते थे। वे विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। फरवरी 2024 में पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, राज्यसभा चुनाव के दौरान उनकी बगावत ने सपा खेमे में खलबली मचा दी थी। पार्टी से दूरियां बढ़ने के बाद अंततः उन्होंने भाजपा का दामन थामा, और अब योगी मंत्रिमंडल में उन्हें ‘कैबिनेट मंत्री’ का दर्जा देकर भाजपा ने उनकी राजनीतिक ताकत को स्वीकार किया है।
ब्राह्मण वोटों पर नजर
मनोज पांडे को कैबिनेट में शामिल करना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। रायबरेली, जो कांग्रेस और सपा का गढ़ रहा है, वहां मनोज पांडे के रूप में भाजपा को एक मजबूत ब्राह्मण चेहरा मिला है। जानकारों का मानना है कि पांडे को बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा ने न केवल रायबरेली और आसपास के जिलों में सपा को कमजोर किया है, बल्कि पूरे प्रदेश के ब्राह्मण समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया है।
योगी सरकार में उनकी एंट्री से यह साफ है कि 2027 की चुनावी बिसात पर भाजपा ने अपने मोहरे बेहद मजबूती से सजाने शुरू कर दिए हैं।












