संयुक्त राष्ट्र की टॉर्चर विरोधी समिति (UN Committee Against Torture) ने पाकिस्तान में मानवाधिकार स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में देश में राजनीतिक नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ कथित तौर पर हो रहे टॉर्चर, मनमानी हिरासत और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
बता दें, रिपोर्ट में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, राजनीतिक कार्यकर्ता इदरीस खट्टक, बुशरा बीबी, अली वज़ीर और महरंग बलूच जैसे नामों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। समिति ने कहा है कि इन मामलों में हिरासत के दौरान उचित चिकित्सा सुविधा और कानूनी अधिकारों की कमी को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
UN समिति ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह सभी ऐसे मामलों की समीक्षा करे, जिनमें लोगों को कथित तौर पर राजनीतिक कारणों से हिरासत में लिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि हिरासत में लिए गए लोगों को किसी भी प्रकार की अमानवीय यातना या दुर्व्यवहार का सामना न करना पड़े।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मानवाधिकार रक्षकों, पत्रकारों, वकीलों और विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ डराने-धमकाने, मनमानी गिरफ्तारी, हिंसा और जबरन गायब करने जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।
इसके अलावा, अफगान नागरिकों की बड़े पैमाने पर वापसी और बिना उचित सुरक्षा मूल्यांकन के उन्हें वापस भेजे जाने पर भी समिति ने चिंता जताई है। UN ने पाकिस्तान से इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
संयुक्त राष्ट्र समिति ने स्पष्ट कहा है कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए और पीड़ितों को न्याय और उपचार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।













