अदाणी पॉवर लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही और पूरे साल के वित्तीय नतीजों की घोषणा करते हुए मजबूत प्रदर्शन का संकेत दिया है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी ने अपनी रणनीति और संचालन दक्षता के दम पर बेहतर नतीजे हासिल किए हैं।
कंपनी के CEO एस.बी. ख्यालिया ने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि थर्मल पावर आने वाले समय में भी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता रहेगा, खासकर तब जब रिन्यूएबल एनर्जी तेजी से बढ़ रही है।
चौथी तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू बढ़कर लगभग 14,560 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्शाता है। वहीं, पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का कुल राजस्व लगभग 53,781 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, मर्चेंट पावर की कीमतों में कमी और कोयले की लागत में गिरावट के कारण सालाना राजस्व पर हल्का दबाव देखने को मिला।
मुनाफे की बात करें तो Q4 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 4,271 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से काफी बेहतर है। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी ने करीब 12,971 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो इसकी स्थिर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
पावर डिमांड के मोर्चे पर भी दिलचस्प तस्वीर सामने आई। ठंड और असामान्य बारिश के चलते फरवरी तक मांग थोड़ी कमजोर रही, लेकिन मार्च में तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग में तेजी आई। पूरे साल के दौरान देश की कुल बिजली मांग में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पीक डिमांड में कुछ गिरावट देखी गई।
कंपनी ने अपने विस्तार योजनाओं पर भी तेजी से काम जारी रखा है। 2032 तक 23.7 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लक्ष्य के तहत कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम प्रगति पर है। महान, रायपुर और रायगढ़ में चल रहे अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल प्रोजेक्ट्स में अच्छा काम हुआ है और इनकी प्रगति संतोषजनक बताई गई है।
इसके अलावा, कंपनी को महाराष्ट्र की बिजली वितरण कंपनी से 1,600 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए 25 साल का बड़ा ऑर्डर मिला है। वहीं, तमिलनाडु में भी एक महत्वपूर्ण पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) साइन किया गया है, जिससे कंपनी की ऑपरेटिंग क्षमता का बड़ा हिस्सा अब दीर्घकालिक अनुबंधों से जुड़ चुका है।
ESG (पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस) के क्षेत्र में भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पानी की खपत कम करने, राख के उपयोग और सिंगल-यूज प्लास्टिक मुक्त संचालन जैसे कदमों ने कंपनी को बेहतर रेटिंग दिलाई है।
हालांकि, कंपनी के कुल कर्ज में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन मजबूत नकदी प्रवाह और संतुलित पूंजी प्रबंधन नीति के चलते इसे नियंत्रित बताया जा रहा है। कंपनी ने हाल ही में 7,500 करोड़ रुपये के डिबेंचर जारी कर अपनी फंडिंग को मजबूत किया है।
कुल मिलाकर, अदाणी ग्रुप की यह कंपनी बदलते ऊर्जा बाजार में खुद को मजबूती से स्थापित करने में सफल दिख रही है और आने वाले वर्षों में इसके और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है।













