नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान अपना पक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून भारतीय महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा और इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी का नया अध्याय शुरू होगा।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी अनिवार्य
अनुप्रिया पटेल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी महज 14 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की वास्तविक मजबूती तभी संभव है जब नीति-निर्माण और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी हो। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर एकजुट रहकर इतिहास बनाने में सहयोग करें।
विपक्ष पर तीखे सवाल: “तब क्यों नहीं किया लागू?”
विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि जब पुरानी सरकारें सत्ता में थीं, तब उन्होंने महिला आरक्षण को लागू क्यों नहीं किया? उन्होंने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरते हुए सवाल किया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने अपने कार्यकाल के दौरान जाति जनगणना क्यों नहीं कराई? उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब सरकार ठोस कदम उठा रही है, तो विपक्ष अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए नए बहाने तलाश रहा है।
महिला सशक्तिकरण का नया दौर
अनुप्रिया पटेल ने जोर देकर कहा कि इस बिल के कानून बनने से देश की आधी आबादी को उनका वाजिब हक मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह विधेयक महिलाओं के सामाजिक और राजनीतिक उत्थान की आधारशिला बनेगा। उन्होंने विपक्ष से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करने का आग्रह किया।













