प्रयागराज में बैंकिंग सेक्टर को हिला देने वाला एक बड़ा घोटाला सामने आया है। केनरा बैंक की सिविल लाइंस शाखा में गोल्ड लोन के नाम पर नकली सोना रखकर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में कुल 18 गोल्ड लोन खातों में धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जिसमें 16 लोगों द्वारा बैंक को चूना लगाने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, इन आरोपियों ने नकली सोने को गिरवी रखकर बैंक से 57 लाख 19 हजार 800 रुपये का गोल्ड लोन प्राप्त किया। समय के साथ इस राशि पर ब्याज जुड़ने के बाद कुल वैल्यू 64 लाख रुपये से अधिक हो गई। मामले का खुलासा होने के बाद बैंक प्रबंधन के होश उड़ गए।
बैंक की ओर से की गई जांच में सामने आया कि यह पूरा फर्जीवाड़ा एक संगठित सिंडिकेट के जरिए किया जा रहा था। इसमें गोल्ड अप्रेजर (स्वर्ण परीक्षक) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। बैंक आमतौर पर गोल्ड लोन देने से पहले सोने की जांच अप्रेजर की रिपोर्ट के आधार पर करता है, लेकिन इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर यह घोटाला किया गया।
शुरुआती चरण में गोल्ड अप्रेजर विष्णु शर्मा की रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों को लोन स्वीकृत किया गया। बाद में दूसरे गोल्ड अप्रेजर कौशल किशोर वर्मा से पुनः जांच कराई गई। इसके अलावा 3 जुलाई 2025 को गोल्ड अप्रेजर सुधांशु वर्मा और 15 जुलाई 2025 को शिवकुमार वर्मा द्वारा दोबारा परीक्षण किया गया, जिसमें गिरवी रखा गया सोना नकली पाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि यह फर्जीवाड़ा केवल एक बैंक तक सीमित नहीं था, बल्कि अन्य जिलों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि एक बड़ा नेटवर्क इस पूरे मामले में सक्रिय था। केनरा बैंक के सहायक महाप्रबंधक और क्षेत्रीय प्रमुख पंकज वर्मा की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। शुरुआत में यह शिकायत जुलाई 2025 में दी गई थी, लेकिन विस्तृत जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया है। कुल 16 नामजद आरोपियों में विष्णु वर्मा, कौशल किशोर वर्मा, पलटू, महेश प्रताप सिंह, श्रीश कुमार श्रीवास्तव, अजय कुमार, मोहम्मद अरमान, विकास कुमार, रवि कुमार, मनोज कुमार, रंजना यादव, फैज खान, कुलदीप कुमार दुबे, आलोक केसरवानी, कार्तिकेय कुमार कौशिक, मृत्युंजय सिंह सहित अन्य अज्ञात शामिल हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। इस खुलासे के बाद बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षा और जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।










